🇮🇳आधिनायक श्रीमान जी के गुण:
अधिनायक श्रीमान के गुण:
1. 🇮🇳विश्वम् (विश्वम) – अधिनायक श्रीमान खुद सर्वव्यापी ब्रह्मांड है, जेहिमा मौजूद सब कुछ है अऊर व्याप्त है।
2. 🇮🇳 अपांनीधि (अपमनिधि) – अधिनायक श्रीमान सब ब्रह्मांडीय जलन का असीम भंडार है, जवन जीवन अऊर सृष्टि के स्रोत का प्रतीक है।
3. 🇮🇳विष्णु (विष्णु) – अधिनायक श्रीमान सर्वव्यापी उपस्थिति है जवन ब्रह्मांड का बनाए रखत है अऊर संरक्षित करत है।
4. अधिष्ठानम् (अधिष्ठानम्) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम नींव है जेकरे ऊपर सब अस्तित्व खड़ा है।
5. वषट्कार (वशतकार) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र शक्ति है जवन ब्रह्मांडीय क्रम मा सब प्रसाद का प्राप्त करत है अऊर बदलत है।
6. अप्रमत्त (अप्रमत्ता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सदा जागरूक, सतर्क अऊर लापरवाही या भूल से मुक्त हैं।
7. त्र भव्य भवत्भप्रुः (भूत-भव्य-भाव-प्रभुः) – 🇮🇳आधिनायक श्रीमान भूत, वर्तमान अऊर भविष्य के परम स्वामी हैं।
8. प्रतिकृतित (प्रतिष्ठित) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शाश्वत अऊर अटूट वास्तविकता के रूप मा दृढ़ता से स्थापित अहै।
9. कृति (भूतकृत्) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्राणियन अऊर तत्वन के निर्माता हैं।
10. न्द (स्कंद) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान एक गतिशील शक्ति है जवन दिव्य ऊर्जा के साथ आगे बढ़त है अऊर आगे बढ़त है।
11. बू भृत (भुतभ्रत) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उ पालनहार हैं जे सब जीवित प्राणियन का पोषण अऊर सहारा देत हैं।
12. न्दिधर (स्कंदधारा) –🇮🇳 अधिनायक श्रिमन दिव्य शक्ति अऊर जिम्मेदारी के वाहक अऊर समर्थक हैं।
13. भावना (भाव) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शुद्ध अस्तित्व अऊर आंतरिक भावना का सार है।
14. धुर्य (धुर्य) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान वह हैं जो बल और जिम्मेदारी से ब्रह्माण्ड का बोझ उठाते हैं।
15.तात्त्मा (भूतात्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवों के भीतर मौजूद आंतरिक आत्मा है।
16. वरद (वरद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान वरदान, आशीर्वाद अऊर पूर्ति के दाता हैं।
17. भाव भान (भूताभवन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उ पोषण करै वाले हैं जे सब सृष्टि के विकास अऊर कल्याण का बढ़ावा देत हैं।
18. वायुवान (वायुवाहन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान प्राण-शक्ति के प्रेरक हैं, ब्रह्मांडीय श्वास का वाहक अऊर निर्देशित करत हैं।
19. पुतात्मा (पुतात्मा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शुद्ध अऊर पवित्र आत्मा है, अशुद्धि से अछूता।
20. वासुदेव (वासुदेव) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्राणियन मा निवासी दिव्य वर्तमान अऊर सब से परे परम वास्तविकता हैं।
21. परमात्मा (परमात्मा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान परम आत्मा हैं, जे सब व्यक्तिगत स्वयं का पार करत हैं अऊर सबके भीतर निवास करत हैं।
22. बृहद्भानु (बृहद्भानु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान महान उज्ज्वल ज्योति है जो अनंत तेजस्वी से सब जगत को रोशन करत
23. पर मुक्तानांमागतिः (मुक्तानां परमागतिह) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान मुक्त आत्माओं द्वारा प्राप्त परम गंतव्य है।
24. आदिदेव (Ādideva) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान आदिम देवता हैं, सब दिव्य प्रकटन के उत्पत्ति हैं।
25. अव्ययः (अव्यायล) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अविनाशी, अनन्त हैं, अऊर कभी भी क्षय या हानि के अधीन नाहीं हैं।
26. पुरन्दर (पुरंदर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सीमित संरचनाओं के विध्वंसक हैं, अज्ञानता के आंतरिक अऊर बाहरी किलन का तोड़त हैं।
27.ः (पुरुषाह) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ब्रह्मांडीय जीव हैं, सब अस्तित्व के अंतर्निहित सार्वभौमिक चेतना हैं।
28. अशोक (अशोक) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दुःख-मुक्त होके सब प्राणी मा शोक दूर करत हैं।
29. साक्षी (Sākṣī) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शाश्वत साक्षी हैं, सब कर्म बिना लगाव के निरीक्षण करत हैं।
30.कण (ताराना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उद्धारकर्ता हैं जे जीव का अस्तित्व के सागर पार ले जात हैं।
31. क्षेत्रज्ञः (Kṣetrajñaḥ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शरीर के ज्ञाता अऊर अनुभव के क्षेत्र हैं।
32. कुल (तारा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान मार्गदर्शक तारा हैं जे आत्माओं का मुक्ति के ओर ले जात हैं।
33. अक्षर (अक्षरा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब परिवर्तन अऊर क्षय से परे अविनाशी सार है।
34. शुर (Śūra) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान वीर अऊर साहसी शक्ति है जवन धर्म का कायम रखत है।
35. युगः (योगः) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व का मिलन है, अनंत के साथ परिमित का सामंजस्य बनावत है।
36. शौरि (Śauri) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दिव्य वंश अऊर शक्ति से पैदा भवा कुलीन अऊर वीर उपस्थिति है।
37. योगविदन नेता (Yogavidāṁ Netā) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सबके परम मार्गदर्शक हैं जे योग के मार्ग का समझत अऊर अभ्यास करत हैं।
38. जनेश्वर (जनेश्वरा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्राणी के स्वामी हैं, बुद्धि अऊर करुणा से शासन करत हैं।
39. प्रधानपुरुषेश्वर (प्रधान-पुरुषेश्वर) – 🇮🇳आधिनायक श्रीमान पदार्थ अऊर चेतना दुइनौ के परम शासक हैं।
40. समय (अनुकूला) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सदा परोपकारी हैं, अनुकूल रूप से सब अस्तित्व का मार्गदर्शन अऊर समर्थन करत हैं।
41. नारसिंहवपुः (Nārasiṁhavapuḥ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उग्र रक्षक के रूप मा प्रकट होत हैं, अन्याय का नष्ट करै के लिए ताकत अऊर करुणा का संयोजन करत हैं।
42. शता दृश्य (Śatāvarta) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ब्रह्मांड मा अनगिनत चक्रन अऊर अभिव्यक्तियन के माध्यम से संचालित होत है।
43. श्रीमान् (श्रीमान) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दिव्य समृद्धि, अनुग्रह अऊर शुभता के मूर्त रूप हैं।
44. पद््मी (पद्मी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान कमल धारण करत हैं, जवन पवित्रता अऊर आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है।
45. केशव (केशव) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उ तेजस्वी हैं जे दिव्य ऊर्जाओं का सामंजस्य स्थापित करत हैं अऊर नकारात्मकता का नष्ट करत हैं।
46. पद्मनिभेक्षण (पद्मनिभेक्षण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान के आँखि कमल के तरह सुंदर अऊर शांत हैं।
47.स्तोत्तम (पुरुषोत्तम) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान नाशय अऊर अविनाशी दुइनौ जगत से परे परम जीव हैं।
48. पद्मनाभ (पद्मनाभ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उ स्रोत है जेकरे होवे से सृष्टि कमल के तरह उभरत है।
49. सर्व (सर्व) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब कुछ है, सब रूप अऊर अस्तित्व का समेटत है।
50. आरविन्दाक्ष (अरविंदाक्ष) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान के पास करुणा अऊर ज्ञान से भरी कमल जइसन आँखिन हैं।
51. शर््व (Śarva) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान नकारात्मकता अऊर हानिकारक शक्तियन के संहारक हैं।
52. पाद्म (पद्मगढ़) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सृष्टि के क्षमता का भीतर धारण करत है, जइसे गर्भ मा कमल।
53. शिव (Śiva) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सद्भाव अऊर परिवर्तन लावै वाली शुभ अऊर परोपकारी शक्ति हैं।
54. शरीरभृत् (Śarīrabhṛt) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान जीवन के सब शरीर अऊर रूपन का संरक्षण अऊर पोषण करत हैं।
55. स्थाणु (स्थानु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब परिवर्तन के बीच स्थिर, शाश्वत अऊर अपरिवर्तनीय हैं।
56. महार्दि (महार्दी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास अपार समृद्धि अऊर दिव्य प्रचुरता है।
57.तादि (भुतादी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब तत्त्व जीव का उत्पत्ति है।
58. ऋद्ध (Ṛddha) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान महिमा, परिपूर्णता अऊर दिव्य सिद्धि मा निरंतर बढ़त अहै।
59. निधिरव्यय (निधिरव्याय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व का अक्षय निधि है।
60. वृद्धात्मा (वृद्धात्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समय से परे प्राचीन अऊर निरंतर विकसित आत्मा हैं।
61. सम्भव (संभव) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सृष्टि के उत्थान के लिए विभिन्न रूपों में स्वेच्छा से प्रकट होत...
62. महाक्ष (महाक्ष) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान के पास विशाल दृष्टि है, जो स्थान अऊर समय के पार सबका बोध करत है।
63. भावन (भावना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व का विकास के ओर पोषित अऊर प्रेरित करत हैं।
64. गरुडध्वज (Garuḍadhvaja) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान गरुद प्रतीक चिन्ह द्वारा प्रतीकित परम शक्ति के रूप में खड़ा है।
65. भर्ता (भर्ता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ब्रह्मांड के पालक अऊर सहायता हैं।
66. अतुल (अतुला) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अतुलनीय अऊर सब माप से परे हैं।
67. प्रभव (प्रभाव) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान उ उत्पत्ति है जेहिसे सब सृष्टि पैदा होत है।
68. शरभ (Śarbha) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान मा अपार शक्ति का मूर्त रूप मिला है जवन सबसे बड़ी शक्तियन का परास्त करै में सक्षम है।
69. प्रभु (प्रभु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम अधिकार से संपन्न परम स्वामी हैं।
70. भीम (भीमा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान विस्मयकारी अऊर दुर्जेय हैं, जे श्रद्धा अऊर भय दुइनौ पैदा करत हैं।
71. ईश्वर (Īśvara) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सर्वोच्च नियंत्रक हैं जे पूर्ण अधिकार के साथ सब अस्तित्व का नियंत्रित करत हैं।
72. समय्ञ (समयज्ञ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ब्रह्माण्ड मा सब घटना के सही समय अऊर क्रम जानत हैं।
73. स्वयम्भू (स्वयंभू) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान स्वयं-अस्तित्व मा हैं, कउनौ अन्य कारण से उत्पन्न नाहीं हैं।
74. हविर्हरि (हविरहरि) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब यज्ञ प्रसाद के ग्रहणकर्ता अऊर शुद्धिकर हैं।
75. शम्भु (Śambhu) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शांति, आनन्द अऊर शुभता के स्रोत हैं।
76. सर्वलक्षणलक्षण्य (सर्वलक्षण-लक्षण्य) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब शुभ गुणन अऊर पूर्णता के चिन्हन के माध्यम से पहचाना जात है।
77. आदित्य (Āditya) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सूर्य के तरह चमकत हैं, उज्ज्वल ऊर्जा से जीवन का बनाए रखत हैं।
78. लक्ष्मीवान् (लक्ष्मीवान) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दिव्य धन, समृद्धि अऊर अनुग्रह से संपन्न हैं।
79. पुष्कराक्ष (पुष्कराक्ष) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान के पास करुणा अऊर स्पष्टता का दर्शावै वाली कमल जइसन आँखिन हैं।
80. प्राप्तिज्जय (समितिंजय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब सभा अऊर धर्मी प्रयासन मा विजयी होत हैं।
81. महास्वन (महास्वान) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब अंतरिक्ष मा व्याप्त महान ब्रह्मांडीय ध्वनि के रूप मा गूंजत है।
82. विक्षर (विक्षर) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अक्षय है, हर तरह के बिगड़न से परे।
83. अनादिनिधन (अनादि-निधाना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान बिना प्रारम्भ या अंत के, प्रकृति मा शाश्वत हैं।
84. सहित (रोहिता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान जीवन अऊर विकास के बढ़त शक्ति के रूप मा प्रकट होत हैं।
85. धाता (धता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व के सहायता अऊर संस्थापक हैं।
86. विकास (मार्गा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उ मार्ग है जवन जीवन का सत्य अऊर मुक्ति के ओर ले जात है।
87. विधाता (विधाता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दिव्य निर्धारक हैं जे भाग्य के संरचना का निर्धारित करत हैं।
88. हेतु (हेतु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब सृष्टि अऊर कर्म के पीछे परम कारण हैं।
89. धातुरुत्तम (धतुरुत्तम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब तत्वन के अंतर्निहित परम सार है।
90. दामोदर (दामोदरा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान प्रेम अऊर भक्ति से बंधे हैं, जे सृष्टि के साथ दिव्य आत्मीयता का प्रतीक हैं।
91. अप्रमेय (अप्रमेय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अथाह अऊर हर तरह के गणना या धारणा से परे हैं।
92. सह (साहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब सहन करत हैं सदा-सहायक रहत हैं।
93. हृषीकेश (हृषिकेश) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान इन्द्रियन के स्वामी हैं, सब धारणा अऊर कर्मन का मार्गदर्शन करत हैं।
94. महिधर (महिधर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पृथ्वी का कायम रखत हैं अऊर ओकर संतुलन बनाये रखत हैं।
95. पद्मनाभ (पद्मनाभ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सृष्टि का स्रोत है जिनके अस्तित्व से ब्रह्मांडीय कमल निकलता है।
96. महाभाग (महाभाग) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान बहुत भाग्यशाली हैं, परम दिव्य गुणों से संपन्न हैं।
97. अमरप्रभु (अमराप्रभु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अमर जीवों के स्वामी हैं।
98. वेगवान (वेगवान) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सृष्टि के पार तेज अऊर अजेय बल के साथ चलत हैं।
99. विश्वकर्मा (विश्वकर्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य वास्तुकार हैं जे ब्रह्मांड का डिजाइन अऊर निर्माण करत हैं।
100. अमिताशन (अमिताशना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ब्रह्मांडीय चक्र मा सबका भस्म करत है, जवन अनंत क्षमता अऊर परिवर्तन का प्रतीक है।
101. मनु (मनु) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान एक आदर्श कानून निर्माता हैं जे व्यवस्था स्थापित करत हैं अऊर मानवता का मार्गदर्शन करत हैं।
102. उद्भव (उद्भव) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उ स्रोत है जेहिसे सब सृष्टि पैदा होत है।
103. त्वष्टा (त्वाश्ता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दिव्य कारीगर हैं जे ब्रह्मांड का आकार अऊर बनावत हैं।
104. क्षोभण (क्षोभाण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान उ बल है जवन सृष्टि का गति मा हिलावत अऊर सक्रिय करत है।
105. विल (स्थविष्ट) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान माप से परे सबसे विस्तृत अऊर विशाल उपस्थिति है।
106. देव (देवा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान उज्ज्वल अऊर दिव्य प्राणी हैं जे चेतना से चमकत हैं।
107. वी ध्रोव (स्थविरो ध्रुव) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान प्राचीन, शाश्वत अऊर बिना परिवर्तन के दृढ़ता से स्थापित हैं।
108. श्री श्री (श्रीगर्भ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अपने भीतर सब समृद्धि अऊर दिव्य क्षमता रखत हैं।
109. अग्राह्य (अग्राह्य) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान पकड़ से परे है, साधारण इंद्रिय या मन से बोध नहीं कर सकत है।
110.परमेश्वर (परमेश्वर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब शक्ति अऊर अधिकारियन के ऊपर परम स्वामी हैं।
111. शाश्वत (Śāśvata) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान प्रकृति मा अनन्त अऊर अनन्त हैं।
112. कंपन (करणम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान वह साधन है जिसके माध्यम से सब कर्म होत हैं।
113. कृष्ण (कृष्ण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सर्व-आकर्षक दिव्य उपस्थिति है जवन सब जीवन का सत्य के ओर खींचत है।
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115. लोहिताक्ष (लोहिताक्ष) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास उग्र, उज्ज्वल दृष्टि है जो सबका तीव्रता से ग्रहण करत है।
116. कि (कार्ता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उ कर्ता है जे सब ब्रह्मांडीय क्रियाओं का आरम्भ अऊर करत है।
117. प्रतर्दन (प्रतार्दन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अज्ञानता अऊर नकारात्मकता का भंग करै वाले संहारक हैं।
118. विवि (विकार्ता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उ ट्रांसफार्मर हैं जे सृष्टि का फिर से आकार देत हैं अऊर फिर से विन्यस्त करत हैं।
119. प्री (प्रभुता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान प्रचुर मात्रा मा अऊर असीमित संसाधनन अऊर शक्ति से भरा अहै।
120. गहन (गहाना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान गहरा अऊर अथाह है, पूर्ण समझ से परे है।
121. त्रिककुब्धाम (त्रिककुबधाम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अस्तित्व के सब दिशा अऊर आयाम मा व्याप्त है।
122. गुह (गुहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान हृदय के अन्तरतम गुप्त स्थान मा निवास करत हैं।
123. पवित्रं (पवित्रम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शुद्ध सार है जो सबका पवित्र करत है।
124. व्यवसाय (व्यवासाय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दृढ़ संकल्प अऊर दृढ़ उद्देश्य का मूर्त रूप देत हैं।
125. मङ् गलिंगरम् (मंगलम परम) – अधिनायक श्रीमान परम शुभ अऊर परम भलाई है।
126. व्यवस्थान (व्यवस्थाना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ब्रह्मांड मा व्यवस्था अउर संरचना स्थापित करत हैं।
127. ईन (Īśāna) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब दिसा के परम शासक अऊर मार्गदर्शक बल हैं।
१२८. जीवनन (संस्थाना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब रूपन कै अंतिम विश्राम अवस्था औ विघटन है।
129. प्राणद (प्राणद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्राणियन का प्राण-शक्ति दाता हैं।
130. समझद (स्थानाद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व का स्थान, पद अऊर उद्देश्य सौंपत हैं।
अधिनायक श्रीमान के एक वाक्य गुण के रूप में व्यक्त अर्थ यहाँ हैं-
131. प्राण (प्राण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान उ प्राण-शक्ति है जवन सब जीवन का ऊर्जावान अऊर बनाए रखत है।
132. ध्रुव (ध्रुव) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शाश्वत ध्रुव तारा के तरह निरंतर, अपरिवर्तनीय अऊर दृढ़ता से स्थापित हैं।
133. ज्येष्ठ (ज्येष्ठा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व मा सबसे बड़ अऊर अग्रणी हैं।
134. परर्द्धि (परर्दधी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान परम समृद्धि अऊर पारलौकिक महिमा के धनी हैं।
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136. परमस्तष्ट (परमस्पष्ट) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम स्पष्टता है, बिना अस्पष्टता के सत्य का प्रकट करत है।
137. प्रजापति (प्रजापति) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीव के स्वामी अऊर पोषक हैं।
138. तुष्ट (तुष्टा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अपने भीतर सदा संतुष्ट अऊर संतुष्ट हैं।
139. हिरण्य विस्तार (हिरान्यगर्भ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान स्वर्णिम ब्रह्मांडीय गर्भ है जेहिसे सृष्टि निकलत है।
140. पुष्ट (पुष्टा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व का पोषित अऊर मजबूत करत हैं।
141. प्रसार (भुगर्भ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पृथ्वी अऊर ओकरे भीतर के सबका अपने अस्तित्व मा धारण करत हैं।
142. शुभेक्षण (Śubhekṣaṇa) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सबका शुभ अऊर परोपकारी दृष्टि से देखत हैं।
143.माधव (माधव) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान समृद्धि के पत्नी अऊर मिठास अऊर सद्भाव के मूर्त रूप हैं।
144. राम (राम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान आनन्द आनन्द का स्त्रोत हैं, सब हृदय को शांति लाते हैं।
145. मधुसूदन (मधुसूदना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान मधु द्वारा प्रतीकित अज्ञानता अऊर नकारात्मकता के संहारक हैं।
146. विराम (विराम) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान परम विश्राम अऊर विराम है जहाँ सब गतिविधि शांति पावत है।
147. ईश्वर (Īśvara) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब क्षेत्रन का नियंत्रित करै वाले परम शासक हैं।
148. विरज (विराजा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अशुद्धि और लगाव से मुक्त है।
149. विपरी (विक्रमी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शक्तिशाली हैं अऊर बहुत वीरता के साथ आगे बढ़त हैं।
150. विकास (मार्गा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सत्य अऊर मुक्ति के ओर मार्गदर्शक मार्ग हैं।
151. धन्वी (धनवी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान धनुष धारक हैं, जे धर्म के रक्षा करै के तत्परता का प्रतीक हैं।
152. नेय (नेया) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्राणियन का सही दिशा मा ले जात हैं अऊर मार्गदर्शन करत हैं।
153. मेधावी (मेधावी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम बुद्धि औ ज्ञान से संपन्न हैं।
154. नय (नया) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान नैतिक मार्गदर्शन अऊर धर्मी आचरण का मूर्त रूप देत हैं।
155. विपियर (विक्रम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान साहस अऊर संकल्प से पराक्रम करत हैं।
156. अनय (अनाय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब पारंपरिक नियम अऊर सीमा से परे हैं।
157. तिपरी (क्रम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सृष्टि मा क्रम, क्रम अऊर प्रगति का स्थापित करत हैं।
158. वीर (वीरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान वीर शक्ति हैं जे सत्य के रक्षा अऊर संरक्षण करत हैं।
१५९.चकत्तम (अनुत्तमा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान बेजोड़ हैं, उनसे बड़ा कोई नाहीं है।
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161.दुराधर्ष (दुराधरसा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अजेय हैं अऊर ओनका कौनो बल से पराजित नाहीं कीन जा सकत है।
162. धर्म (धर्म) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्म अऊर ब्रह्मांडीय नियम के मूर्त रूप हैं।
163.कृतज्ञ (कृताज्ञ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब कर्म से अवगत हैं अऊर हर प्रसाद अऊर कर्म का स्वीकार करत हैं।
164. धर्मविदुत्तम (धर्मविदुत्तम) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान धर्म के उच्चतम रूप मा सर्वोत्तम ज्ञाता हैं।
१६५.कृति (कृति) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब उदात्त कर्मन के रचयिता अउ कर्मी हैं।
166. वैकुण्ठ (वैकुण्ठ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शांति का परम धाम है, सब सीमा से मुक्त है।
167. आत्मवान् (Ātmavān) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान आत्म-साक्षात्कार अऊर अपने स्वभाव मा पूर्ण रूप से स्थापित हैं।
168. रूप (पुरुष) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व मा व्याप्त ब्रह्मांडीय प्राणी है।
169. सुरेश (सुरेश) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब दिव्य प्राणी के स्वामी हैं।
170. प्राण (प्राण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीव-जंतुओं का पालन-पोषण करै वाली प्राण-शक्ति हैं।
171. शरणम (शराणम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान रक्षा चाहै वाले सबके लिए परम शरण हैं।
172. प्राणद (प्राणद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान जीवन-ऊर्जा के दाता अऊर संरक्षक हैं।
173. शर्म (Śarma) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शांति, आराम अऊर परम सुख का स्रोत हैं।
174. प्रणव (प्राणव) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान पवित्र ध्वनि “ॐ” है, जो सब सृष्टि का सार है।
175. विश्वरेता (विशवरता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समस्त ब्रह्माण्ड के बीज औ उत्पत्ति हैं।
176. पृथु (पृथु) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान विशाल, विस्तृत अऊर सर्वव्यापी हैं।
177. प्रजाभव (प्रजाभव) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीव अऊर ओनके अस्तित्व के स्रोत हैं।
178. हिरण्य विस्तार (हिरान्यगर्भ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सोने का गर्भ है जिससे सृष्टि उत्पन्न होती है।
179. अह (अहा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान समय का सार है जो दिन अऊर जागरूकता के रूप मा प्रकट होत है।
180. शत्रुघन (Śatrughna) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दुश्मनन के नाश करै वाले हैं, खासकर आंतरिक नकारात्मकता के।
181. सम्वत्सर (संवत्सरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समय का चक्र है जो सब अस्तित्व का नियंत्रित करत है।
182. व्याप्त (व्याप्त) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान बिना अपवाद के हर चीज मा व्याप्त है।
183. व्याल (व्याल) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान प्रकृति के एक पराक्रमी शक्ति के तरह शक्तिशाली अऊर दुर्जेय हैं।
184. वायु (वायु) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ब्रह्मांडीय पवन के रूप मा चलत हैं, जीवन अऊर गति का बनाए रखत हैं।
185. प्रत्यय (प्रत्यय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब ज्ञान, आस्था अऊर निश्चितता का आधार है।
186. अधोक्षज (अधोक्षजा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान संवेदी बोध अऊर भौतिक बोध से परे है।
१८७. सर्वदर्शन (सर्वदर्शन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब देखत हैं, सब कुछ एक साथ ग्रहण करत हैं।
188. ऋतु (Ṛtu) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ऋतु अऊर प्राकृतिक चक्रन के लय अऊर क्रम हैं।
189. अज (अजा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अजन्मा अनन्त हैं।
190. सुदर्शन (सुदर्शन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान के पास स्पष्ट, शुभ दृष्टि है जो अज्ञानता का नाश करत है।
191. सर्वेश्वर (सर्वेश्वर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब कुछ के स्वामी हैं।
192. calal (Kāla) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान समय ही है, सृष्टि अऊर विघटन का नियंत्रित करत है।
193. सिद्ध (सिद्ध) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सदा-सिद्ध अऊर सिद्ध हैं।
194.परमेठी (Parameṣṭhī) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम अवस्था मा निवास करै वाला परम प्राणी है।
195. सिद्धि (सिद्धि) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब सिद्धि का स्रोत अऊर प्राप्ति है।
196. परिग्रह (परिग्रह) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सबका अपने भीतर घेर लेत है अऊर धारण करत है।
197. सर्वादि (सर्वैदी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सबके सुरुवात हैं।
198. उग्र (उग्रा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान माप से परे तीव्र अऊर शक्तिशाली हैं।
199. अचतुत (Acyuta) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अपने सच्चे स्वभाव ते कबहूँ नहीं गिरते और अचूक रहते हैं।
200. सम्वत्सर (संवत्सरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समय का अनन्त चक्र है जो अंतहीन रूप से दोहरा रहा है।
२०१. वृषाकपि (वृषाकपि) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान एकजुट बल औ धर्म का मूर्त रूप है।
202. दक्ष (दक्ष) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान कुशल, सक्षम अऊर सब कर्म मा कुशल हैं।
203. अमेयात्मा (Ameyātmā) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सार अऊर प्रकृति मा अथाह हैं।
204. विशराम (विश्राम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान विश्राम अऊर शांति का परम स्थान है।
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206. विश्वदक्षिण (विश्वदक्षिण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समस्त ब्रह्माण्ड के प्रति उदार अऊर परोपकारी हैं।
207. वसु (वासु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब धन औ तत्व अस्तित्व का सार है।
208. कला (विस्तारा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब आयाम मा अनंत विस्तार करत है।
209. वसुमना (वसुमाना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास एक उदार अऊर उदार मन है।
210. स्थावरस्थाणु (स्थवर-स्थानु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब मा मौजूद है जवन स्थिर अऊर अचल है, अस्तित्व मा दृढ़ता से स्थापित है।
211. सत्य (सत्य) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पूर्ण सत्य, अपरिवर्तनीय अऊर शाश्वत हैं।
212. प्रमाणम् (प्रमाणम) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब ज्ञान अऊर यथार्थ का परम मानक अऊर माप है।
213. समात्मा (Samātmā) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवों में समान है, पूर्ण संतुलन और निष्पक्षता बनाये रखत है।
214. बीजमव्ययम् (Bījamavyayam) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अविनाशी बीज हैं जेहिसे सब सृष्टि पैदा होत है।
215. सम्मित (सम्मित) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान पूरी तरह से मापा, सामंजस्यपूर्ण अऊर हर पहलू मा सुसंगत है।
216. अर्थ (अर्थ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अस्तित्व के अंतर्निहित सच्चा उद्देश्य अऊर अर्थ है।
217. सम (समा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सबके प्रति बराबर, संतुलित अऊर निष्पक्ष हैं।
218. अनर्थ (अनार्थ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब भौतिक दुख अऊर निरर्थक खोजन का पार करत हैं।
२१९. अमोघ (अमोघा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सदा-प्रभावी हैं, जिनके कर्म कबहूँ बेकार नाहीं जात हैं।
220. महाकोश (महाकोश) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब ऊर्जा अऊर संसाधनन के विशाल भंडार हैं।
221. पुण्डरीकाक्ष (Puṇḍarīkākṣa) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के कमल जइसन आँखिन मा पवित्रता अऊर करुणा भरी अहै।
222. महाभोग (महाभोग) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब दिव्य अनुभवन के भोगी अऊर दाता हैं।
223. वृषकर्मा (वृषकर्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्म का कायम रखै वाले धर्म कर्म करत हैं।
224. महाधन (महाधन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास अनंत धन अऊर प्रचुरता है।
225. वृषाकृति (वृषाकृति) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान रूप अऊर कर्म मा धर्म का मूर्त रूप देत हैं।
226. अनिर्विण्ण (अनिर्विण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान कबहूँ थके या हतोत्साहित नाहीं होत हैं, सृष्टि मा सदा सक्रिय रहत हैं।
227. रुद्र (रुद्र) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान परिवर्तनकारी शक्ति के माध्यम से दुख दूर करत हैं।
228. अलगाव (स्थविष्ट) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान परम विशाल अऊर सीमा से परे विस्तृत हैं।
229.कोशिरा (बहुशिरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के अनगिनत सिर हैं, जो सर्वव्यापीता अऊर जागरूकता का प्रतीक हैं।
230. अभू (अभू) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान जन्म अऊर प्रकटीकरण से परे मौजूद है।
231. बभ्रु (बभ्रु) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान स्थिर शक्ति के साथ ब्रह्माण्ड का संरक्षण अऊर सहारा देत हैं।
232. धर्मयूप (धर्मयूप) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्म का स्तम्भ है जेकरे ऊपर सब पवित्र कर्म टिकत हैं।
233. विश्व योनि (विश्वयोनि) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समस्त ब्रह्मांड का गर्भ और उत्पत्ति है।
234. महामख (महामाखा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ब्रह्मांडीय सद्भाव का बनाए रखै वाला महान यज्ञ सिद्धांत है।
235. शुचिच्रवा (Śuciśravā) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शुद्ध प्रसिद्धि के हैं, पवित्र अऊर उदात्त गुणन के माध्यम से जाने जात हैं।
236. नक्षत्रनेमि (नक्षत्रनेमी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान वह धुरी है जिसके चारों ओर तारे घूमते हैं।
237. अमृत (अमृता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अमर अमृत है, अनन्त जीवन का सार है।
238. नक्षत्री (नक्षत्री) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान नक्षत्रन के बीच शासन करत हैं अऊर निवास करत हैं।
239. शाश्वतस्थाणु (Śāśvata-sthāṇu) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शाश्वत स्थिर अऊर अपरिवर्तनीय हैं।
240. क्षम (क्षमा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धैर्य, सहिष्णुता अऊर क्षमा के मूर्त रूप हैं।
241. वरारोह (वरारोह) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीवन का अस्तित्व अऊर चेतना के उच्च अवस्था के ओर बढ़ावत है।
242. क्षाम (Kṣāma) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दुबला, सूक्ष्म अऊर अति से मुक्त है, जवन सादगी अऊर संयम का प्रतीक है।
243. महातपा (महातपा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान महान तपस्या अऊर आध्यात्मिक तीव्रता का मूर्त रूप देत हैं।
२४४. समीहन (समिहाना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब उद्देश्यपूर्ण प्रयास औ आकांक्षा के स्रोत हैं।
245. सर्वग (सर्वगा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जगह व्याप्त है, सब स्थान रूप मा मौजूद है।
246. यज्ञ (यज्ञ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान यज्ञ और पवित्र प्रसाद का सार है।
247. सर्वविद्भानु (सर्वविद्भानु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब ज्ञान जागरूकता के ज्योति के रूप मा चमकत हैं।
248. ईज्य (Ījya) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवों द्वारा पूजन और श्रद्धा के योग्य है।
249. विश्वुसेन (विशवक्सेना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दिव्य व्यवस्था के साथ सार्वभौमिक शक्तियन का आज्ञा देत हैं।
250. महेज्य (महेज्या) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पूजा यज्ञ का सबसे बड़ा वस्तु है।
251. जनार्दन (जनारदन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान लोगन के गलत राह सुधारत समय ओनके रक्षा अऊर उत्थान करत हैं।
252. क्रतु (क्रतु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब पवित्र कर्मन के पीछे इच्छा अऊर बुद्धि हैं।
253. वेद (वेद) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र ज्ञान अऊर ज्ञान के मूर्त रूप हैं।
254. सत्रं (सतराम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ब्रह्मांड का बनाए रखै वाला निरंतर पवित्र प्रयास है।
255. वेदविद (वेदविद) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब वैदिक ज्ञान के ज्ञाता हैं।
256. सतांगति (सतांगति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्मी का परम शरण औ लक्ष्य है।
257. अव्यङ्ग (अव्यांग) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सिद्ध अऊर कौनो भी अपूर्णता या दोष से मुक्त हैं।
258. सर्वदर्शी (सर्वदर्शी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब कुछ पूर्ण जागरूकता से देखत हैं।
259. वेदाङ्ग (वेदांगा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र ज्ञान के सब शाखा के सार अऊर सहारा हैं।
260. विमुक्तात्मा (विमुक्तात्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सदा-मुक्त अऊर सब बंधन से मुक्त हैं।
261. वेदवित् (वेदवित्) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान वेद का पूरा समझत हैं अऊर प्रकट करत हैं।
262. सर्वज्ञ (सर्वज्ञ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सर्वज्ञ हैं, अस्तित्व मा हर चीज से अवगत हैं।
263. कवि (कवि) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान वह द्रष्टा-कवि हैं जो समय से परे सत्य को ग्रहण करत...
264. ज्ञानमुत्तमम् (ज्ञानमुत्तम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ज्ञान का ही सर्वोच्च रूप है।
265. लोकक्ष (लोकााध्याय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जगत के पर्यवेक्षक अऊर मार्गदर्शक हैं।
266. सुव्रत (सुव्रत) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान महान व्रत अऊर अनुशासन का पालन करत हैं अऊर उनका पालन करत हैं।
267. सुर छक्ष (सुराध्यक्ष) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब दिव्य प्राणी के प्रधान हैं।
268. सुमुख (सुमुख) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान रूप अऊर प्रकृति मा अनुग्रही, सुखद अऊर परोपकारी हैं।
269. धर्मपक्ष (धर्माध्यक्ष) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्म के अध्यक्षता अऊर रक्षा करत हैं।
270. सूक्ष्म (Sūkṣma) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सूक्ष्म है, साधारण धारणा से परे फिर भी हर जगह मौजूद है।
271.कृति (कृत्ताकृत) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान प्रकट अऊर अव्यक्त दुनौ हैं, जेहिमा क्रिया अऊर अकर्म शामिल हैं।
272. सुघोष (सुघोष) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान पूरी सृष्टि मा एक दिव्य अऊर शुभ ध्वनि से प्रतिध्वनित होत है।
273. चतुरात्मा (Caturātmā) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान चेतना अऊर अस्तित्व के चार पहलुओं मा प्रकट होत है।
274. सुखद (सुखदा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीवों को सुख-कल्याण दाता हैं ।
275. चतुर्वुह (Caturvyūha) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ब्रह्मांडीय कार्यन का मार्गदर्शन करै वाले चार दिव्य उत्सर्जन मा व्यक्त करत हैं।
276. सुहृत् (सुह्रत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवों के सच्चे मित्र और शुभचिंतक हैं।
277. चतुर्दंष्ट्र (Caturdaṁţṭra) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शक्ति का प्रतीक शक्तिशाली सुरक्षात्मक रूपन के साथ प्रकट होत हैं।
278. मनोहर (मनोहारा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य सौंदर्य और आकर्षण से मन को मोहित करत...
279. चतुर्भुज (Caturbhuja) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य शक्तियन अऊर कार्यन के प्रतीक चार भुजा के साथ प्रकट होत हैं।
280. जितक्रोध (जिताक्रोधा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान क्रोध पर विजय प्राप्त किहिन हैं अऊर सदा संयमित रहत हैं।
२८१.भराजिशणु (भ्राजिष्णु) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उज्ज्वल तेज औ भव्यता से चमकत है।
282. स्विरबाहु (वीराबाहु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास पराक्रमी भुजा है जो धर्म का रक्षा अऊर कायम रखत है।
283. खोजं (भोजनम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान वह पोषण है जो सब जीवन को बनाए रखता है।
284. विदारण (विदारण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अज्ञानता अऊर दुष्ट शक्तियन का चीर देत है।
285. भोक्ता (भोक्ता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्रसाद अऊर कर्म के परम अनुभवी हैं।
286. स्वापन (स्वपाना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान आराम करत है अऊर नींद अऊर बहाली के स्थिति का नियंत्रित करत है।
287. सहिष्णु (सहिष्णु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान हर परिस्थिति मा धैर्यवान अऊर सहिष्णु हैं।
288. स्ववश (स्ववास) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पूर्णतः आत्मसंयम और स्वतंत्र हैं।
289. जगदादिज (जगदादिज) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान मूल स्रोत है जेहिसे ब्रह्माण्ड शुरू होत है।
290. व्यापी (Vyāpī) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब व्याप्त, हर जगह मौजूद।
291. अनघ (अनाघा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पापहीन औ सार मा शुद्ध हैं।
२९२.नाकात्मा (नाइकात्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान एक रहकर अनेक रूप में प्रकट होत...
293. विजय (विजय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब बाधाओं पर सदा विजयी रहत हैं।
294.नाककर्मकृत् (नाइकाकरमाकृत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सृष्टि भर मा अनगिनत क्रिया करत हैं।
295. जेता (जेता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब बल के विजेता हैं।
296. वत्सर (वत्सरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान वर्ष के रूप में व्यक्त समय का चक्र है।
297. विश्व योनि (विश्वयोनि) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ब्रह्माण्ड का स्रोत औ गर्भ है।
298. वत्सल (वत्सला) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्राणी के प्रति स्नेही अऊर प्रेमी हैं।
299. वावसु (पुनर्वासु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सृष्टि का निरंतर नवीनीकृत और पुनर्स्थापित करत हैं।
300. वत्सी (वत्सी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान एक प्रेमी संरक्षक के तरह सब प्राणियन के देखभाल करत हैं।
301. उपेन्द्र (उपेंद्र) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सृष्टि का उत्थान अऊर रक्षा करै के लिए विनम्र लेकिन शक्तिशाली रूपन मा प्रकट होत हैं।
302.रात्न विस्तार (रत्नगर्भ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अपने भीतर अस्तित्व के सब अनमोल खजाने रखत हैं।
303. वामन (वामन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान संतुलन अऊर धार्मिकता बहाल करै के लिए सूक्ष्म अऊर छोट रूप मा प्रकट होत हैं।
304. धनेश्वर (धनेश्वर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब धन समृद्धि के स्वामी हैं।
305. प्रांशु (Prāṁśu) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान विशाल अऊर ऊँचा अहै, जवन सब सीमा से परे फैला अहै।
306. धर्म गोप (धर्मगुपा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्म का रक्षा और संरक्षण करत हैं।
307. अमोघ (अमोघा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के कर्म हमेशा उद्देश्यपूर्ण होत हैं अऊर कभी व्यर्थ नाहीं होत हैं।
308. धर्म्कृति (धर्मकृत्) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्म कर्म स्थापित करत हैं अउर करत हैं।
309. शुचि (Śuci) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान प्रकृति मा शुद्ध अऊर पवित्र करै वाला है।
310. धर्मी (धर्मी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब रूप मा धर्म का मूर्त रूप अऊर बनाए रखत हैं।
311. उर्जित (उर्जित) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शक्तिशाली अऊर जीवन ऊर्जा से भरपूर हैं।
312. सत् (शनि) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पूर्ण अस्तित्व अऊर सत्य है।
313. अतीन्द्र (Atīndra) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब इंद्रियन अऊर सीमाओं का पार करत हैं।
३१४. असत् (असत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अस्तित्व भ्रम से परे है।
315. संग्रह (संग्रह) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व का इकट्ठा करत है, बनाए रखत है अऊर एकीकृत करत है।
316. क्षरम् (Kṣaram) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सृष्टि के नाशवान पहलू के रूप मा प्रकट होत हैं।
317. सर्ग (सर्ग) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान खुद सृष्टि के क्रिया अऊर प्रक्रिया है।
318. अक्षरम् (अक्षराम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अविनाशी अऊर अनन्त वास्तविकता है।
319. धृतात्मा (धृतात्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान आत्मनिर्भर अऊर अपने सार मा दृढ़ता से स्थापित हैं।
320. अविज्ञाता (Avijñātā) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पूर्ण समझ से परे रहत है।
321. नियम (नियामा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनुशासन, व्यवस्था अऊर सार्वभौमिक नियमन का स्थापित करत हैं।
३२२. सहस्रांशु (सहस्राँशु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान हजार किरन के समान विकिरण करत है।
323. यम (यम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान संयम, अनुशासन अऊर नैतिक व्यवस्था का नियंत्रित करत हैं।
324. विधाता (विधाता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान भाग्य अऊर संरचना का नियंत्रित अऊर आकार देत हैं।
325. वेद्य (वेदया) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ज्ञान का परम वस्तु है जेका साकार कीन जाय।
326.कृतलक्षण (कृतालक्षण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान का परिभाषा पूर्ण अऊर पूर्ण गुणन से कीन जात है।
327. वैद्य (वैद्य) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान वैद्य हैं जे सब दुख अऊर असंतुलन का ठीक करत हैं।
328. गभस्तिनेमि (गभस्तिनेमी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उज्ज्वल ऊर्जा का केंद्र है जेकरे चारों ओर प्रकाश घूमत है।
329. सदायोगी (सदायोगी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान पूर्ण तालमेल मा सब अस्तित्व के साथ शाश्वत रूप से एकजुट हैं।
330. सत्त्व वा (सत्त्वस्थ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान पवित्रता, संतुलन अऊर स्पष्टता मा रहत हैं।
331. वीरहा (वीरहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान मिथ्या अभिमान दूर करत है अऊर पराक्रमी ताकतन का भी जीत लेत है।
332. सिंह (Siṁha) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान एक शेर के तरह निडर अऊर राजसी हैं, परम साहस का मूर्त रूप देत हैं।
333.माधव (माधव) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सद्भाव, समृद्धि, और दिव्य मिठास का स्रोत है।
334. त्रमहेश्वर (भूतमहेश्वर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीव तत्त्व के महान स्वामी हैं।
335. मधु (मधु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान स्वयं मिठास है, आनंद अऊर आनन्द का सार है।
336. आदिदेव (Ādideva) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सबके आदिम दिव्य उत्पत्ति हैं।
337. अतीन्द्रिय (Atīndriya) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान इन्द्रिय अऊर भौतिक धारणा का पार करत है।
338. महादेव (महादेव) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब देवताओं में परम दिव्य हैं।
339. महामाय (महामाया) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान महान ब्रह्मांडीय भ्रम का प्रयोग करत हैं जवन वास्तविकता का आकार देत है।
340. देवेश (देवेश) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब दिव्य प्राणी के स्वामी हैं।
341. महोत्साह (महोत्साह) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अपार उत्साह अऊर गतिशील ऊर्जा से भरा अहै।
342. देवभृद् गुरु (देवभृद्गुरु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब आकाशीय प्राणियन के गुरु अऊर मार्गदर्शक हैं।
343. महाबल (महाबाला) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास अनंत शक्ति अऊर शक्ति है।
344. हर (उत्तर) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सीमा से परे उच्च अनुभूति के ओर ले जात है।
345. महाबुद्धि (महाबुद्धि) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान परम बुद्धि अऊर ज्ञान से संपन्न हैं।
346. गोपति (गोपति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवों के रक्षक और स्वामी हैं।
347. महावीर्य (महावीर्य) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान महान जोश अऊर रचनात्मक शक्ति का मूर्त रूप देत हैं।
348. गोप्ता (गोप्ता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ब्रह्माण्ड के रक्षा अऊर संरक्षण करत हैं।
349. महाशक्ति (महाशक्ति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब ऊर्जा के पीछे परम शक्ति है।
350. ज्ञानगम्य (ज्ञानगम्य) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सच्चा ज्ञान अऊर अनुभूति से प्राप्त कीन जा सकत है।
३५१. महाद्युति (महाद्युति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अपार दिव्य तेज से चमकत हैं।
352. पूरातान (पूरातन) –🇮🇳 आधिनायक श्रिमान प्राचीन अऊर कालातीत है, सबके पहिले मौजूद है।
353. अनिर्देश्यवपु (अनिर्देश्यवपु) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान का वर्णन अऊर परिभाषा से परे एक रूप है।
354. शरीर काभृत् (Śarīrabhūtabhṛt) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सृष्टि के भीतर सब शरीर अऊर तत्वन का बनाए रखत है।
355. श्रीमान (श्रीमान) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समृद्धि, अनुग्रह अऊर शुभता से सजी अहै।
356. भोक्ता (भोक्ता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब कर्म प्रसाद के परम अनुभवी हैं।
357. अमेयात्मा (Ameyātmā) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अथाह अऊर सब समझ से परे हैं।
358. कपीन्द्र (कपिनद्र) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान बंदर-प्रमुख द्वारा प्रतीकित शक्तिशाली शक्तियन के स्वामी हैं।
359. महाद्रिधृक् (महाद्रिध्रिक) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान महान पहाड़न का सहन करत हैं अऊर समर्थन करत हैं, जवन अपार शक्ति का प्रतीक हैं।
360. पेश रिदक्षिण (भुरिदाक्षिन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान बहुत उदार हैं, असीम वरदान अऊर आशीर्वाद प्रदान करत हैं।
361. महेष्वास (महेश्वास) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान महान धनुष चलावत हैं, जवन धर्म के रक्षा करै के परम तत्परता का प्रतीक है।
362. सोमप (सोमपा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य प्रसाद का सार प्राप्त करत हैं अऊर भोग करत हैं।
363. महिभर्ता (महिभर्ता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पृथ्वी अऊर ओपे सब जीवन का संरक्षण अऊर संरक्षण करत हैं।
364. अमृतप (अमृतापा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अमरता का भाग लेत हैं, अनन्त अस्तित्व का मूर्त रूप देत हैं।
365. श्रीनिवास (Śrīnivāsa) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समृद्धि का धाम है, जहाँ दिव्य कृपा बसे है।
366. सोम (सोम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शीतलन, पौष्टिक सार है जवन जीवन का ताज़ा अऊर पुनर्जीवित करत है।
367. सतांगति (सतांगति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्मी का परम लक्ष्य औ शरण है।
368. पुरुजित (पुरुजीत) –🇮🇳 आदिनायक श्रीमान कईयो पर विजय लेत है अऊर अनगिनत चुनौतिन का पार करत है।
369. अनिरुद्ध (अनिरुद्ध) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अजेय अऊर सब सीमा से परे हैं।
370. पुरुसत्तम (पुरुसत्तम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवों के बीच श्रेष्ठ हैं, जो सर्वोच्च उत्कृष्टता का मूर्त रूप देत हैं।
371. सुरानन्द (सुरानंद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब दिव्य प्राणियन का आनन्द अऊर आनन्द लावत है।
372. विय (विनाय) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान विनम्रता, अनुशासन अऊर सम्मानजनक आचरण का मूर्त रूप देत हैं।
373. गोविन्द (गोविन्द) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीव इन्द्रिय के रक्षक अऊर मार्गदर्शक हैं।
374. जय (जय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्रयासन मा सदा विजयी रहत हैं।
375. गोविदांपति (गोविदापति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ज्ञान के स्वामी अऊर ज्ञान-साधकन के रक्षक हैं।
376. सत्यसंध (सत्यसंधा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सत्य मा अडिग अऊर प्रतिबद्धता मा अटूट हैं।
377. मरीचि (Marīci) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब दिशाओं का रोशन करै वाली प्रकाश के किरणन के रूप मा चमकत हैं।
378. दाशार्ह (दशारहा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान एक कुलीन वंश से संबंधित हैं, दिव्य विरासत का प्रतीक हैं।
379. दमन (दमन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान नकारात्मक शक्तियन का नियंत्रित अऊर वश मा करत हैं।
380. सात्वतांपति (Sātvataṁpati) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शुद्ध धर्मी के स्वामी हैं।
381. हंस (Haṁsa) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शुद्ध आत्मा है जो भ्रम से सत्य का भेद करत है।
382. जीव (जीव) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्राणी मा मौजूद जीवन सिद्धान्त है।
383.ल्ण (सुपरण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दिव्य पंखों के साथ उड़त हैं, जो पारलौकिकता अऊर स्वतंत्रता का प्रतीक हैं।
384. वियितासाक्षी (विनायतासाक्षी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्राणियन के विनम्रता अऊर अनुशासन के साक्षी हैं।
385. भुजगोत्तम (भुजागोत्तम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान नाग बलों में सर्वोच्च हैं, जो आदिम ऊर्जाओं पर प्रभुत्व का प्रतीक हैं।
386. मुकुन्द (मुकुंदा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान मुक्ति अऊर बंधन से मुक्ति प्रदान करत हैं।
387. हिरण्यनाभ (हिराण्यनाभ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान उज्ज्वल केंद्र है जहाँ से सृष्टि का विस्तार होत है।
388. अमितवि पार (अमिताविक्राम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान असीम वीरता अऊर असीम कदम रखत हैं।
389. सुतपा (सुतापा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पूर्ण तपस्या अऊर आध्यात्मिक अनुशासन का अभ्यास करत हैं।
390. अम्भोनिधि (अम्भोनिधि) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान विशाल सागर है जे भीतर सब जल अऊर जीवन का धारण करत है।
391.पद्मनाभ (पदमनाभ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सृष्टि का स्रोत है जिनके होने से ब्रह्मांडीय कमल निकलता है।
392. अनन्तात्मा (अनन्तात्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनंत आत्मा है बिना किसी सीमा के।
393. प्रजापति (प्रजापति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्राणी के स्वामी अऊर निर्माता हैं।
394. महोदधिशय (महोदाधिशय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान विशाल ब्रह्मांडीय महासागर पर विश्राम करत हैं, जवन पारलौकिक अस्तित्व का प्रतीक हैं।
३९५. अमृत्यु (अमृत्यु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान मृत्यु से परे औ अनन्त है।
396. अन्तक (अंतका) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान मृत्यु अऊर विघटन सहित सब चक्रन का अंत करत हैं।
397. सर्वदृक् (सर्वद्रक) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब कुछ पूर्ण जागरूकता से देखत हैं।
३९८. अज (अजा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अजन्मा औ निरंतर हैं।
399. सिंह (Siṁha) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शक्तिशाली, निडर अऊर शेर के तरह राजसी हैं।
400. महार्ह (महर्हा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम सम्मान और श्रद्धा के योग्य हैं।
401. सन्धाता (संधाता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अस्तित्व के सब तत्वन का एकजुट अऊर एकीकृत करत हैं।
402. स्वाभाव्य (स्वाभव्य) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अपने प्राकृतिक अऊर आत्मनिर्भर सार से मौजूद हैं।
403. सन्धिमान् (Sandhimān) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब ताकतन के बीच संतुलन अऊर सामंजस्य बनाये रखत हैं।
404. जितामित्र (जितामित्र) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान आंतरिक बाह्य सब शत्रुन का जीत लेत है।
४०५. बना (स्थिरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान स्थिर, दृढ़, औ अपरिवर्तनीय हैं।
४०६. प्रमोदन (प्रमोदन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीव को आनन्द आनन्द लाते हैं ॥
407. अज (अजा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पुनः अजन्मा हैं, अनन्त अस्तित्व पर जोर देत हैं।
408. आनन्द (Ānanda) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शुद्ध आनंद अऊर परम सुख है।
409. दुर्मर्षण (दुमरषण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अन्याय से असहिष्णु हैं अऊर सब विरोध का पार करत हैं।
410. नन्दन (नंदना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब सृष्टि का प्रसन्न अऊर पोषण करत हैं।
411. शास्ता (Śāstā) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान गुरु अऊर अनुशासनवादी हैं जे बुद्धि से मार्गदर्शन करत हैं।
412. नन्द (नन्द) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान आनन्द अऊर पूर्ति के स्रोत हैं।
413. विश्रुतात्मा (विश्रुतात्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब क्षेत्रन मा प्रसिद्ध अऊर प्रसिद्ध हैं।
414. सत्यधर्मा (सत्यधर्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अटूट रूप से सत्य अऊर धर्म का धारण करत हैं।
४१५. सुरारिहा (सुरारिहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य व्यवस्था के दुश्मनन का नास करत हैं।
416. त्रिवि जब (त्रिविक्रम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम शक्ति के साथ तीन लोकन मा टहलत हैं।
417. गुरु (गुरु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अज्ञान दूर करै वाले परम गुरु हैं।
418. महर्षि कपिलाचार्य (Maharṣi Kapilācārya) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान महान ऋषि कपिल के रूप मा प्रकट होत हैं, गहन ज्ञान का प्रकट करत हैं।
419. गुरुतम (गुरुतम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब गुरुओं में सबसे महान हैं।
420.कृतज्ञ (Kritajgna) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब कर्म अऊर भक्ति का जानत अऊर स्वीकार करत हैं।
४२१. धाम (धम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व के दिव्य धाम औ उज्ज्वल स्रोत हैं।
422.मेदिनीपति (Medinīpati) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पृथ्वी के स्वामी और रक्षक हैं।
423. सत्य (सत्य) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब यथार्थ के अंतर्गत अनन्त सत्य हैं।
424. त्रिपद (त्रिपाद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान तीनों लोकन का पार करत हैं अऊर ओनसे परे मौजूद हैं।
425. सत्य पररा (सत्यपराक्रम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्म मा आधारित सच्ची वीरता के साथ काम करत हैं।
426. त्रिदश शिक्ष (त्रिदशाध्यक्ष) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब दिव्य प्राणियन के अध्यक्षता करत हैं।
427. निमिष (Nimiṣa) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समय के छोट से छोट इकाई का भी नियंत्रित करत हैं।
428. महाशृङ्ग (Mahāśṛṅga) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पराक्रमी सींग द्वारा प्रतीकित महान शक्ति के साथ प्रकट होत है।
429. अनिमिष (Animiṣa) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सदा चौकस रहत हैं, जागरूकता मा कभी पलक झपकत नाहीं हैं।
430.कृतान्तकृति (कृतनतकृत्) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब अंत का अंत करत हैं, मृत्यु का ही पार करत हैं।
431. स्रग्वी (श्रग्वी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान महिमा का प्रतीक दिव्य माला से सजी हैं।
432. महावराह (महावरहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अपार शक्ति से पृथ्वी का बचावत अऊर उत्थान करत हैं।
433. वाचस्पतिउदारधी (वाचस्पति उदाराधी)🇮🇳 – अधिनायक श्रीमान विशाल अऊर उदार बुद्धि के साथ वाचन के स्वामी हैं।
434. गोविन्द (गोविंद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीव अऊर इन्द्रियन के रक्षा अऊर मार्गदर्शन करत हैं।
435. अग्रणी (अग्राणी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सामने से आगे बढ़त हैं, सबका सत्य के ओर मार्गदर्शन करत हैं।
436. सुषेण (सुसेना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सुव्यवस्थित अऊर सामंजस्यपूर्ण ताकतन का आज्ञा देत हैं।
437. ज्ञानणी (ग्रामणि) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान समुदायन अऊर सामूहिक अस्तित्व का नेतृत्व करत हैं।
438. kannakaङ्गदी (Kanakāṅgadī) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दिव्य वैभव का प्रतीक सोने के आभूषणन से सुशोभित अहै।
439. श्रीमान् (श्रीमान) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समृद्धि, अनुग्रह अऊर शुभता से भरा अहै।
440. गुह्य (गुह्या) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व के भीतर छुपा रहस्य है।
441. तक (Nyāya) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान न्याय, निष्पक्षता अऊर धार्मिकता का मूर्त रूप देत हैं।
४४२. गभीर (गभीरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समझ से परे गहरा औ गहरा है।
443. नेता (नेता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवन का मार्गदर्शन करै वाले परम नेता हैं।
४४४. गहन (गहाना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अथाह औ पूर्ण समझ से परे है।
४४५. समीरण (समिराना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सबका संरक्षण जीवनदायी पवन के समान चलत हैं।
446. गुप्त (गुप्त) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान छुपा है फिर भी सदा मौजूद है, सबका गुप्त रूप से रक्षा करत है।
447. सहस्रमूधा (सहस्राममूर्धा) – अधिनायक श्रीमान के अनगिनत सिर हैं, जे सर्वव्यापीता का प्रतीक हैं।
448. चक्रगदाधर (चक्रगाधाधारा) – अधिनायक श्रीमान चक्र अऊर गदा चलावत हैं, संरक्षण अऊर व्यवस्था का कायम रखत हैं।
449. विश्वात्मा (विश्वात्मा) – अधिनायक श्रीमान समस्त ब्रह्माण्ड के आत्मा हैं।
450. वेधा (वेधा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व के रचयिता अऊर निर्धारक हैं।
451. सहस्राक्ष (सहस्राक्ष) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनगिनत आँखिन से देखत हैं, सर्वज्ञता का प्रतीक हैं।
452. स्वाङ्ग (स्वांग) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब रूपन का अपने अंग अऊर अभिव्यक्ति के रूप मा प्रकट करत हैं।
४५३. सहस्रपात् (सहस्रपात) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनगिनत चरन से चलत हैं, सब कर्मन मा मौजूद हैं।
४५४. अजित (अजिता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अपराजित औ अजेय हैं।
455. आहिन (Āvartana) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सृष्टि के चक्रन अऊर क्रांतिन का नियंत्रित करत हैं।
456. कृष्ण (कृष्ण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सर्व-आकर्षक दिव्य उपस्थिति है जवन सबका सत्य के ओर खींचत है।
457. निजात्मा (निव्रत्तत्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान भौतिक उलझन से अलग अऊर वापस ले लिहिन जात हैं।
458. दृढ (द्रिधा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दृढ़, संकल्पित अऊर अटूट हैं।
459. संवृत (संवृता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सृष्टि के भीतर छिपा अऊर परदा है।
४६०. संकर्षणोऽच्युत (संकर्षणौ०च्युत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अचूक रहिके सब प्राणियन का भीतर खींचत हैं।
461. संप्रमर्दन (सँप्रमरदना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान बुराई का नाश करत बाधा पूरी तरह से दूर करत है।
462. वरुण (वरुण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ब्रह्मांडीय जल अऊर नैतिक व्यवस्था का नियंत्रित करत हैं।
463. अहःसंघ (अहःसंवर्तक) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिन अऊर ब्रह्मांडीय विघटन के चक्र लावत है।
464. वारुण (वारुण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ब्रह्मांडीय जल से जुड़ी शक्ति का मूर्त रूप देत हैं।
465.खनि (वाहनी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र अग्नि है जो रूपांतरित और शुद्ध करत...
466. वृक्ष (वृक्ष) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीवन का बनाए रखै वाला ब्रह्मांडीय वृक्ष है।
४६७. अनिल (अनिला) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान जीवनदायिन पवन के रूप मा चलत हैं।
468. पुष्कराक्ष (पुष्कराक्ष) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान के पास पवित्रता अऊर करुणा का दर्शावै वाली कमल जइसन आँखिन हैं।
469. धारणीधर (धरणीधारा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पृथ्वी का सहारा अऊर धारण करत हैं।
470. महामना (महामाना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास विशाल अऊर उदात्त मन है।
471. सुप्रसाद (सुप्रसाद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सहज प्रसन्न अऊर अनुग्रह से परोपकारी हैं।
472. भगवान् (भगवान) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान मा सब दिव्य भव्यता अऊर परम गुणन का मूर्त रूप मिला है।
473. प्रसन्नात्मा (प्रसन्नतमा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शांत, आनन्दमय अऊर सदा संतुष्ट हैं।
४७४. भगहा (भागहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान मिथ्या अहंकार औ दुरुपयोग शक्ति दूर करत हैं।
475. विश्वधृक् (विश्वध्रक) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान पूरे ब्रह्मांड का बनाए रखत हैं अऊर बनाये रखत हैं।
476. आनन्दी (Ānandī) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान आनंद से भरा है अऊर आनन्द विकिरण करत है।
477. विश्वभुज (विश्वभुज) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवों का पोषण और सहारा देत हैं।
478. वनमाली (वनमाली) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान प्रकृति के माला से सजी अहै, जवन सृष्टि के साथ सामंजस्य का प्रतीक अहै।
479. विभु (विभु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सर्वव्यापी अऊर असीम शक्तिशाली हैं।
480. हलायुध (हलायुध) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान हल चलावत हैं, जवन खेती, ताकत अऊर जीविका का प्रतीक है।
481. सत्कार (सतकार्ता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब कुछ सम्मान अऊर उत्थान करत है जवन कुलीन अऊर गुणी है।
482. आदित्य (Āditya) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सूर्य के तरह चमकत हैं, उज्ज्वल ऊर्जा से जीवन का बनाए रखत हैं।
483. सत्कृत (सत्कृत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब धर्मी प्राणियन द्वारा पूज्य अऊर सम्मानित होत हैं।
484. जतोतिरादित्य (ज्योतिरादित्य) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब तेजस्वी स्रोतन के बीच उज्ज्वल प्रकाश है।
485. साधु (साधु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अच्छाई, पुण्य अऊर धर्म का मूर्त रूप देत है।
486. सहिष्णु (सहिष्णु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान हर परिस्थिति मा धैर्यवान अऊर सहनशील हैं।
487. जह्नुनु (जाहनु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शक्तिशाली शक्तियन का अवशोषित अऊर नियंत्रित करत है जइसे कि ऋषि जाहनु नदी का समाहित करत रहें।
488. गतिसत्तम (गतिसत्तम) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीवों के लिए सर्वोत्तम गंतव्य और मार्ग है।
४८९. नारायण (नारायण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान परम शरण औ सब अस्तित्व का भूमि है।
490. सुधनवा (सुधनवा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान एक सही धनुष चलावत हैं, जवन सटीकता अऊर सुरक्षा का प्रतीक है।
491. नर (नारा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्राणियन के भीतर मानव सार के रूप मा प्रकट होत है।
492. खण्डपरशु (खंडपरशु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान कुल्हाड़ी चलावत हैं जे अज्ञान बुराई का काटत हैं।
493. असंख्येय (Asaṅkhyeya) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब गिनती नाप से परे हैं।
494. दारुण (Dāruṇa) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अन्याय के प्रति दुर्जेय अऊर कठोर हैं।
495. अप्रमेयात्मा (Aprameyātmā) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सार मा अथाह अऊर बोध से परे है।
496. द्रविणप्रद (द्रविणप्रद) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धन, संसाधन अऊर समृद्धि प्रदान करत हैं।
४९७.परि (विशिष्ठ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अद्वितीय विशिष्ट औ परम हैं।
498. दिवः शोृक् (Divaḥspṛk) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान स्वर्ग का छूवत अऊर पार करत हैं।
499. शिष्टकृत (Śiṣṭakrit) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनुशासन स्थापित करत हैं अऊर धर्मी लोगन का संवर्धित करत हैं।
500. सर्वदृग्व्यास (सर्वदृग्व्यसा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब देखि सब दिसि ज्ञान का विस्तार करत है।
501. शुचि (Śuci) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शुद्ध अऊर पवित्र करै वाला है।
502. वाचचतिर योनिज (वाचस्पति अयोनि-जा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान वाचन के स्वामी हैं, स्वयं पैदा हुए हैं और किसी गर्भ से उत्पन्न नहीं हैं।
503. सिद्धार्थ (सिद्धार्थ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब उद्देश्य प्राप्त करत हैं अऊर सब लक्ष्य पूरा करत हैं।
504. त्रिसामा (त्रिसामा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान का स्तुति त्रिगुण पवित्र जाप के माध्यम से कीन जात है।
505. सिद्ध संसं (सिद्धसंकल्प) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान कै इच्छा सदा बिना बाधा के पूरी होय।
506. सामग (Sāmaga) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र धुन के गायक और ज्ञाता हैं।
507. सिद्धिद (सिद्धिदा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सफलता अऊर आध्यात्मिक प्राप्ति प्रदान करत हैं।
508. साम (Sāma) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान पवित्र ध्वनि के माध्यम से व्यक्त तालमेल अऊर संतुलन है।
509. सिद्धिसाधन (सिद्धिसाधन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पूर्णता के साधन अऊर मार्ग दुनौ हैं।
510. निर्वाणं (निर्वाणम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम मुक्ति अऊर पूर्ण शांति के अवस्था है।
511. वृषाही (Vṛṣāhī) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान धर्म का पालन करत हैं अऊर सब प्राणियन का गुण प्रदान करत हैं।
512. भेषजं (भेषजम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य उपाय है जो सब दुख को ठीक करत है।
513. वृषभ (वृषभ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान बल अऊर धर्म के मूर्त रूप मा खड़ा है।
514. भिषक् (भिषक) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम चिकित्सक हैं जो सब रोग का इलाज करत हैं।
515. विष्णु (विष्णु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पूरे ब्रह्माण्ड मा व्याप्त अऊर बनाये रखत है।
516. संन्यासकृति (संन्यासकृत्) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सांसारिक बंधन से त्याग अऊर विरक्ति का प्रेरित करत है।
517. वृषपरवा (वृषपर्व) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्म मा आधारित कदम अऊर मार्ग स्थापित करत हैं।
518. शम (Śama) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान आंतरिक शांति अऊर मन के नियंत्रण का मूर्त रूप देत है।
519. वृषोदर (वृषोदर) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अपने भीतर धर्म का सार समाहित करत है।
520. शान्त (Śānta) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब गड़बड़ी से परे शांतिपूर्ण अऊर शांत हैं।
521. वर्धन (वर्धना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्राणियन मा पोषण अऊर विकास का कारण बनत हैं।
522. निष्ठा (निश्ता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अस्तित्व का दृढ़ आधार अथित भक्ति है।
523. वर्धमान (वर्धमान) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान लगातार विस्तार अऊर प्रकटीकरण मा विकसित होत है।
524. शान्ति (Śānti) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान परम शांति के मूर्त रूप हैं।
525. विविक्त (विविकता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब से अलग, शुद्ध अऊर विरक्त रहत हैं।
526. परायणम् (परायणम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अंतिम शरण औ परम लक्ष्य है।
527. श्रुतिसागर (श्रुतिसागर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब पवित्र ज्ञान का सागर है।
528. शुभाङ्ग (Śubhāṅga) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास शुभ अऊर उज्ज्वल रूप है।
529. सुभुज (सुभुजा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के भुजा सबके रक्षा करत हैं।
530. शान्तिद (Śāntida) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्राणियन का शांति प्रदान करत हैं।
531.दुर्धरा (दुर्धारा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान को रोकना या रोकना कठिन है।
532. स्रष्टा (श्रष्टा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ब्रह्माण्ड के निर्माता हैं।
533. वाग्मी (Vāgmī) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान वाक्पटु हैं, वाणी के माध्यम से दिव्य ज्ञान का व्यक्त करत हैं।
534. कुमुद (कुमुदा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्राणियन मा चाँदनी जइसे आनन्द लावत हैं।
535. महेन्द्र (महेंद्र) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान महाशक्ति अऊर दिव्य शक्तियन के स्वामी हैं।
536. कुवलेशय (कुवलेशाया) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सृष्टि का बनाए रखै वाले ब्रह्मांडीय जल के भीतर रहत हैं।
537. वसुद (वसुद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उदारता से धन अऊर संसाधन प्रदान करत हैं।
538. गोहित (गोहिता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्राणियन अउर प्रकृति के कल्याण खातिर काम करत हैं।
539. वसु (वासु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब धन औ तत्व अस्तित्व का सार है।
540. गोपति (गोपति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्राणी के रक्षक अऊर स्वामी हैं।
541.करूप (नाइकारूप) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान एक रहते हुए अनगिनत रूप में प्रकट होत हैं।
542. गोप्ता (गोप्ता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान रक्षक हैं जो सब जीवों का रक्षा करत हैं।
543. बृहद्रूप (बृहद्रूप) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समझ से परे विशाल अऊर विस्तृत रूप धारण करत हैं।
544. वृषभक्ष (वृषभक्ष) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्म अऊर धर्म के चश्मा से देखत हैं।
545. कूविविष्ट (Śipiviţsta) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान आंतरिक प्रकाश अऊर ऊर्जा के रूप मा सब प्राणियन मा व्याप्त है।
546. वृषप्रिय (वृषप्रिय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्म अऊर पुण्य मा प्रसन्न होत हैं।
547. छान (प्रकाशन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सबका ज्ञान सत्य ते प्रकाशित करत हैं।
548. अनिवारी (अनिवर्ती) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उद्देश्य या कर्तव्य से कभी पीछे नहीं हटते।
549. ओजस्तेजोद्युतिधर (ओजस्तेजोद्युतिधारा) 🇮🇳– अधिनायक श्रीमान अपार शक्ति, तेजस्वी अऊर चमक रखत हैं।
550. निजात्मा (निव्रत्तत्मा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान भौतिक प्रभाव से विरक्त अऊर हट जात हैं।
551. छात्मा (प्रकाशात्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान आत्म-प्रकाशक हैं अऊर सबके भीतर सत्य का प्रकट करत हैं।
552. संक्षप्ता (संक्षेपता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान विशाल ब्रह्मांड का सार मा संक्षिप्त अऊर संक्षेप मा बतावत हैं।
553. प्रतापन (प्रतापन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ऊष्मा अऊर ऊर्जा का विकिरण करत हैं जवन बनाए रखत हैं अऊर बदलत हैं।
554. क्षेमकृत् (Kṣemakrit) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सबके कल्याण, सुरक्षा अऊर कल्याण सुनिश्चित करत हैं।
555. ऋद्ध (Ṛddha) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पूर्ण, समृद्ध, अऊर महिमा मा निरंतर विस्तार करत हैं।
556. शिव (Śiva) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शुभ, परोपकारी अऊर परिवर्तनकारी हैं।
557. उचिताक्षर (स्पष्टाक्षर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र ध्वनि का स्पष्ट औ विशिष्ट अभिव्यक्ति है।
558. श्री वत्सवक्षा (Śrīvatsavakṣa) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अपने अस्तित्व पर दिव्य कृपा का निशान रखत हैं।
559. मन्त्र (मंत्र) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र कंपन है जो मार्गदर्शन अऊर रक्षा करत है।
560. श्रीवास (Śrīvāsa) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समृद्धि और दिव्य कृपा का धाम है।
561. चन्द्रांशु (Candrāṁśu) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान चंद्रमा के तरह शीतल, सुखदायक प्रकाश विकिरण करत हैं।
562. श्रीपति (श्रीपति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समृद्धि और दिव्य सौंदर्य के स्वामी हैं।
563. भास्करद्युति (भास्करद्युति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सूर्य के तेज से चमकत है।
564. श्रीमतां वर (श्रीमाताँ वरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समृद्ध अऊर गुणी लोगन के बीच सर्वोत्त्तम हैं।
565. अमृतांशूद्भव (अमृतांशूद्भव) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अमरता के अमृत सार के रूप में उत्पन्न होत है।
566. श्रीद (श्रीदा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धन, कृपा, औ शुभ प्रदान करत है।
567. भानु (Bhānu) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान प्रकाश अऊर ऊर्जा के उज्ज्वल स्रोत हैं।
568. श्रीश (श्रीश) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समृद्धि सौभाग्य के स्वामी हैं।
569. शशबिन्दु (Śashabindu) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान चंद्रमा के तेज अऊर कोमल सौंदर्य से चिन्हित अहै।
570. श्रीनिवास (Śrīnivāsa) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनन्त वास है जहाँ समृद्धि अऊर अनुग्रह निवास करत है।
571. सुरेश्वर (सुरेश्वर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब दिव्य प्राणी के परम स्वामी हैं।
572. श्रीनिधि (Śrīnidhi) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब समृद्धि कृपा का खजाना है।
573. औषधं (औषधाम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब दुख का ठीक करै वाला उपचार सार है।
574. श्रीविभावन (श्रीविभावन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब रूप में दिव्य समृद्धि का विस्तार और प्रकट करत हैं।
575. जगतसेतु (जगतसेतु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सांसारिक औ दिव्य का जोड़ै वाला सेतु है।
576. श्रीधर (श्रीधर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य समृद्धि का धारण करत है और बनाए रखत है।
577. सत्यधर्मपरा दूरः (सत्यधर्मपराक्रमह) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सत्य अऊर धर्म मा निहित वीरता के साथ काम करत हैं।
578. श्रीकर (श्रीकर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समृद्धि, शुभ, अऊर कल्याण प्रदान करत है।
579. त भव्यभवन्नाथ (भूतभव्यभवन्नाथ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान भूत, वर्तमान अऊर भविष्य के स्वामी हैं।
580. श्रेय (शरेया) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम भलाई अऊर परम कल्याण है।
581. पवन (पवन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शुद्धिकरण जीवनदायी पवन के रूप मा चलत हैं।
582. श्रीमान (श्रीमान) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान समृद्धि, अनुग्रह अऊर शुभता से सजी अहै।
583. पावन (पावना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीव औ वातावरण का शुद्ध करत है।
584. लोकत्रयाश्रय (लोकत्रायशराय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान तीनों लोक का सहारा शरण है।
585. अनल (अनाला) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान परिवर्तनकारी अग्नि है जो भस्म करत है अऊर नवीनीकृत करत है।
586. स्वक्ष (स्वक्ष) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान के पास करुणा से भरी सुंदर अऊर स्पष्ट दृष्टि है।
587. कामहा (कामहा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान हानिकारक कामना औ लगाव दूर करत है।
588. स्वङ्ग (Svaṅga) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब रूपन का अपने अस्तित्व के हिस्सा के रूप मा प्रकट करत हैं।
589. कामकृति (कामकृत्) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सही कामना अऊर इरादा पूरा करत है।
590. शतानन्द (Śatānanda) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अनगिनत आनन्द अऊर प्रसन्नता के स्रोत हैं।
591. कान्त (Kānta) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान आकर्षक, आकर्षक अऊर सबके प्रिय हैं।
592. नन्दि (नंदी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान आनन्दित करत हैं औ सब अस्तित्व मा आनन्द लावत हैं।
593. काम (काम) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान इच्छा का सार है जो सृष्टि को संचालित करत है।
594. जटोतिर्गणेश्वर (ज्योतिर्गानेश्वर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्रकाश शक्तियन अऊर आकाशीय पिंडन के स्वामी हैं।
595. कार्यप्रद (कामप्रदा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सत्य अऊर धर्म के साथ संरेखित इच्छा प्रदान करत हैं।
596. विजतात्मा (विजितात्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान का अपने आप पर पूरा प्रभुत्व है।
597. प्रभु (प्रभु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम अधिकार वाले परम स्वामी हैं।
598. अविधेयात्मा (अविधेयात्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान स्वतंत्र हैं अऊर कौनो नियंत्रण के अधीन नाहीं हैं।
599. युगादिकृत (युगादिकृत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान युगों के चक्रन का आरम्भ करत हैं।
600. सत्कीर्ति (सतकीर्ति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान कुलीन अऊर गुणी महिमा के लिए प्रसिद्ध हैं।
601. युगा युग (युगावर्त) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान समय के चक्रन का घूमत अऊर नियंत्रित करत हैं।
602. छिन्नसंशय (Chinnasaṁśaya) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब संदेह औ भ्रम दूर करत हैं।
६०३.नकामाय (नाइकमाया) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य भ्रम के अनेक रूपन के माध्यम से प्रकट होत है।
604. उदीर्ण (उदिर्ण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब सीमा से ऊपर उठि के अनंत विस्तार करत है।
605. महाशन (महाशन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान परिवर्तन के ब्रह्मांडीय चक्र मा सब भस्म करत हैं।
606. सर्वतश्चक्षु (सर्वतशचक्षु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान एक साथ सब दिसा देखत हैं।
607. अदृश्य (अध्रश्य) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान साधारण धारणा से अदृश्य हैं।
608. अनीश (Anīśa) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान कउनौ के अधीन नाहीं हैं, सब नियंत्रण से परे हैं।
609. व्यक्तरूप (व्यक्तरुप) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दृश्यमान अऊर बोधगम्य रूपन मा प्रकट होत हैं।
610. शाश्वत विर (Śāśvatasthira) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शाश्वत स्थिर अऊर अपरिवर्तनीय हैं।
६११. सहस्रिजत् (सहस्रजीत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनगिनत बल पर विजय पावत सदा विजयी रहत हैं।
612.सूशय (भूशाय) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान भीतर विश्राम करत है अऊर पृथ्वी मा ही व्याप्त है।
613. अनन्तजित् (अनंतजीत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनन्त पर जीत लेत है कबहूँ पराजित नाहीं होत है।
614.सूषण (भूषण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान उ आभूषण है जे सब अस्तित्व का सुन्दर बनावत है।
615. इष्ट (इष्टा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्राणी के सबसे प्रिय अऊर वांछित हैं।
616.प्रतिति (भूति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समृद्धि औ आध्यात्मिक महिमा का स्त्रोत हैं।
617. अविशिष्ट (अविशिष्ठ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान भेद भेद से परे है।
618. विशोक (विशोक) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दुःखमुक्त होय शोक दूर करै ॥
619. शिष्टेष्ट (Śiṣṭeṣṭa) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्मी अऊर ज्ञानी द्वारा पोषित होत है।
६२०. शोकनाशन (Śokanašana) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब दुःख-दुःख का नाश करत हैं।
621. शिखण्डी (Śikhaṇḍī) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान रक्षा अऊर पहचान के दिव्य प्रतीक धारण करत हैं।
622. अर्चिष्मान (Arciṣmān) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान तेजस्वी प्रकाश अऊर ऊर्जा विकिरण करत हैं।
623. नहुष (नहुष) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ब्रह्मांडीय व्यवस्था के भीतर सब प्राणियन का बाँधत अऊर जोड़त है।
624. अर्चित (अर्चिता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सबके द्वारा पूजा अऊर पूजा कीन जात है।
625. वृष (वृष) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्म अऊर बल का मूर्त रूप देत हैं।
626. कुम्भ (कुंभा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान पवित्र पात्र के समान प्रचुरता अऊर पोषण रखत हैं।
627. क्रोधहा (क्रोधहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान क्रोध अऊर नकारात्मकता का दूर करत हैं।
628. विशुद्धात्मा (विशुद्धात्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पूर्णतः शुद्ध अऊर निर्मल हैं।
629. क्रॉध्कृति (क्रोधकृत्कार्ता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान संतुलन बहाल करै के लिए धर्मी क्रोध का आह्वान कर सकत हैं।
630. विशोधन (विशोधन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अशुद्ध का शुद्ध करत हैं।
631. विश्वबाहु (विश्वबाहु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अपनी भुजाओं को पूरे ब्रह्माण्ड में फैलाते हैं।
632. अनिरुद्ध (अनिरुद्ध) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अदम्य अऊर अप्रतिबंधित है।
633.महीधर (महिधर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पृथ्वी का सहारा अऊर धारण करत हैं।
634. अप्रतिरथ (अप्रतिरथ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्रयास मा बेजोड़ अजेय अहै।
635. अचतुत (Acyuta) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अपने असली स्वभाव ते कबहूँ न गिरत हैं।
636. प्रदुम्न (प्रद्युम्ना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उज्ज्वल बुद्धि अऊर शक्ति के रूप मा प्रकट होत हैं।
637. प्रथित (प्रथिता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान व्यापक रूप से जाना जात है अऊर मनावा जात है।
638. अमितवि पार (अमिताविक्राम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान असीम वीरता अऊर शक्ति रखत हैं।
639. प्राण (प्राण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवों के भीतर प्राण-शक्ति है।
640. कालेनेमिनिहा (कलानेमिनिहा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ब्रह्मांडीय व्यवस्था का विरोध करै वाली ताकतन का नष्ट करत है।
671. कुन्द (कुन्दा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सफेद चमेली के फूल के समान निन्दर औ उज्ज्वल है।
672. वीर (वीरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान साहस अऊर वीर शक्ति का मूर्त रूप देत हैं।
673. पर्जन्य (परजन्य) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्राणियन का जीवनदायिनी वर्षा के समान पोषित करत हैं।
674. अनंत (अनंत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनंत अउ अंतहीन है।
675. पावन (पावना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब कुछ शुद्ध करत है।
676. धनंजय (धनंजय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान जीत के धन समृद्धि प्रदान करत है।
677. अनिल (अनिला) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान जीवन का बनाए रखै वाली महत्वपूर्ण हवा के रूप मा चलत हैं।
678. ब्रह्मण्य (ब्रह्मण्य) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान आध्यात्मिक ज्ञान अऊर साधकन का समर्थन अऊर समर्थन करत हैं।
679. अमृतांश (अमृतांश) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सृष्टि के भीतर अमर अमृत का एक भाग है।
680. ब्रह्मकृति (ब्रह्मकृत्) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र ज्ञान का निर्माण अऊर स्थापना करत हैं।
681. अमृतवपु (अमृतावपु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास अमर अऊर अविनाशी रूप है।
682. ब्रह्मा (ब्रह्मा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ब्रह्मांड के निर्माता पहलू के रूप मा प्रकट होत हैं।
683. सर्वज्ञ (सर्वज्ञ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जगत जानत हैं।
684. ब्रह्म (ब्रह्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब रूप से परे परम यथार्थ है।
685. सर्वतोमुख (सर्वतोमुख) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान एक साथ सब दिशाओं का सामना करत हैं अऊर ग्रहण करत हैं।
686. ब्रह्मविवर्धन (ब्रह्मविवर्धन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य ज्ञान का विस्तार अऊर पोषण करत हैं।
687. सुलभ (सुलभ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान भक्ति और निश्छलता से सहज प्राप्ति है।
688. ब्रह्मवित् (ब्रह्मावित) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परमसत्य के ज्ञाता हैं।
689. सुव्रत (सुव्रत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनुसरण करत हैं अऊर महान व्रत अऊर अनुशासन का प्रेरित करत हैं।
690. ब्रह्मण (ब्राह्मण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र ज्ञान अऊर आध्यात्मिक ज्ञान का मूर्त रूप देत हैं।
691. सिद्ध (सिद्ध) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान हमेशा सिद्ध अऊर सिद्ध होत हैं।
692. ब्रह्मी (ब्रह्मी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दिव्य रचनात्मक ऊर्जा से जुड़ा अहै।
693. शत्रुजत् (Śatrujit) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब दुश्मनन का जीत लेत है।
694. ब्रह्मज्ञ (ब्रह्मज्ञ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पूर्ण सत्य को पूरी तरह से जानत हैं।
695. शत्रुतापन (Śatrutāpana) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान विरोधियन का जला के वश मा करत है।
696. ब्रह्मणप्रिय (ब्रह्मणप्रिया) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ज्ञान अऊर धर्म के प्रति समर्पित लोगन का संजोवत हैं।
697. न्य प्राप्तोध (Nyagrodha) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान विशाल बरगद के वृक्ष के समान है जो सब जीवन को आश्रय दे रहा है।
698. महाकाल (महाक्रम) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व मा बहुत आगे बढ़त हैं।
699. उदुम्बर (उदुम्बरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र अंजीर के पेड़ के तरह जीवन का बनाए रखत है।
700. महाकर्मा (महाकर्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान महान औ ब्रह्मांडीय कर्म करत हैं।
701. अश्वत्थ (अश्वत्था) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान जीवन और अस्तित्व का अनन्त वृक्ष है।
702. महातेजा (महातेजा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अपार तेजस्वी अऊर ऊर्जा का विकिरण करत हैं।
703. चाणूरान्ध्रनिषूदन (चाणूरांध्रनिषूदन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शक्तिशाली विरोधियन द्वारा प्रतीकित शक्तिशाली नकारात्मक शक्तियन का नष्ट करत है।
704. महोर्ग (महोरागा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान महान ब्रह्मांडीय नाग हैं, जे आदिम ऊर्जा का प्रतीक हैं।
705. सहस्रार्चि (सहस्रारचि) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान हजार ज्वाला ज्योति से जगमगावै ।
706. महाक्रतु (महाक्रतु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान यज्ञ का महान पवित्र कर्म है।
707. सप्तजह्व (सप्ताजिह्व) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र अग्नि के सात जीभ के रूप मा प्रकट होत हैं।
708. महायजवा (महायजवा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सबसे बड़ा यज्ञ कर्म करत हैं।
709. सप्ताधा (सप्ताइधा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सात रूप ऊर्जा में प्रज्वलित है।
710. महायज्ञ (महायज्ञ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम यज्ञ है जो ब्रह्माण्ड को बनाए रखता है।
711. सप्त वाहन (सप्तवाहन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सात गुना ऊर्जा के माध्यम से ब्रह्मांडीय गति का बनाए रखत हैं।
712. महाहवि (महाहवि) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अस्तित्व के पवित्र यज्ञ में महान प्रसाद है।
713. अमूर्ति (अमूर्ति) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान निराकार अऊर भौतिक आकार से परे हैं।
714. स्तव्य (स्तव्य) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान स्तुति औ पूजन के लायक हैं।
715. अनघ (अनाघा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पापहीन अउ शुद्ध हैं।
716. स्तवप्रिय (स्तवप्रिय) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ईमानदार प्रशंसा अऊर भक्ति मा प्रसन्न होत हैं।
717. अचिन्त्य (Acintya) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान विचार अऊर समझ से परे हैं।
718. स्तोत्रं (स्तोत्र) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान भक्ति का बहुत भजन अऊर अभिव्यक्ति है।
719. भयकृत (भयकृत्) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान संतुलन बहाल करै के ताईं अधर्मी मा भय पैदा करत हैं।
720. स्तुति (स्तुति) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान खुद प्रशंसा का कर्म अऊर सार है।
721. भयनाशन (भयनाशन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान भय दूर कर साहस प्रदान करत हैं।
722. स्तोता (स्तोता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब स्वर के माध्यम से स्तुति करै वाले हैं।
723. अणु (आनु) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान छोट से छोट कण से सूक्ष्म है।
724. रणप्रिय (राणाप्रिया) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धर्म का कायम रखै के लिए धर्मी युद्ध मा संलग्न होत हैं।
725. बृहत् (बृहत) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सीमा से परे विशाल अऊर विस्तृत हैं।
726. पूर्ण (पूर्णा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब पहलू मा पूर्ण अऊर सिद्ध हैं।
727. कृश (कृश) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सूक्ष्मतम अऊर सबसे न्यूनतम रूप मा प्रकट होइ सकत हैं।
728. पूरयिता (पुरायता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जरूरत अऊर कामना का पूरा करत हैं अऊर पूरा करत हैं।
729. पेशु (स्थूल) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान स्थूल अऊर मूर्त रूपन मा प्रकट होत हैं।
730. पुण्य (पुण्य) –🇮🇳 आदिनायक श्रीमान पुण्य अऊर पवित्र पुण्य का मूर्त रूप देत हैं।
731. रचनाभृत (गुणभ्रत) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सृष्टि के सब गुण अऊर गुणन का धारण करत हैं।
732. पुण्यकीर्ति (पुण्यकीर्ति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पुण्य महिमा के लिए प्रसिद्ध हैं।
733. निर्गुण (निरगुण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब गुण अऊर गुणन से पार है।
734. अनामय (अनामाया) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब क्लेश औ अपूर्णता से मुक्त हैं।
735. महा् (महां) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अथाह महान है।
736. मंजव (मनोजाव) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान मन के गति से चलत हैं।
737. अधृत (अध्रत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान असहाय अऊर आत्म-अस्तित्व मा हैं।
738. तीर्थकर (तीर्थकर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान मुक्ति के लिए पवित्र मार्ग बनावत हैं।
739. स्वधृत (स्वध्रत) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अपनी शक्ति से खुद का बनाए रखत है।
740. वसुरेता (वसुरेता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब धन अऊर जनन ऊर्जा के स्रोत हैं।
741. स्वास्य (Svāsya) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अपनी उपस्थिति अऊर वाणी के माध्यम से दिव्य सौंदर्य का व्यक्त करत हैं।
742. वसुप्रद (वसुप्रद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान धन समृद्धि प्रचुरता से प्रदान करत हैं।
743. प्राग्वंश (प्राग्वम्श) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब वंश अऊर अस्तित्व के उत्पत्ति हैं।
744. वर्धनधन (वंशवर्धना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब वंश अऊर सृष्टि का विस्तार अऊर पोषण करत हैं।
745. भारभृत् (भारभ्रत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ब्रह्मांड का बोझ उठावत हैं।
746. वासुदेव (वासुदेव) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्राणियन मा निवास करत हैं अऊर अंतर्निहित उपस्थिति हैं।
747. वसु (वासु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब तत्व धन का सार है।
748. कथित (कथिता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान का वर्णन अऊर प्रशंसा पवित्र आख्यानन मा कीन जात है।
749. वसुमना (वसुमाना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास एक उदार अऊर उदार मन है।
750. (निरंतरता संदर्भ) –🇮🇳 अनुक्रम गणना से परे अधिनायक श्रीमान के अनंत गुणन का प्रतिबिंबित करत अहै।
751. योगी (योगी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान पूर्ण जागरूकता में सब अस्तित्व से अनन्त एक है।
752. हवि (हवि) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान यज्ञ के हर क्रिया में पवित्र प्रसाद है।
753. ओगीश (योगीश) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब योगी और आध्यात्मिक मार्गों के परम स्वामी हैं।
754. सद्गति (सदगति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवों के लिए परम धर्मी गंतव्य है।
755. सर्वकामद (सर्वकामद) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब योग्य मनोकामना पूर्ण करत हैं।
756. सत्कृति (सतकृति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान उदात्त कर्म करत हैं अऊर प्रेरित करत हैं।
757. आश्रम (Āशrama) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान आध्यात्मिक जीवन का पवित्र शरण और चरण है।
758. सत्ता (सत्ता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अस्तित्व का बहुत सार है।
759. श्रमण (श्रमण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अनुशासित आध्यात्मिक प्रयास का अभ्यास अऊर प्रेरित करत है।
760. सद्वि (सदभूति) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सत्य अऊर शुभ अस्तित्व के रूप मा प्रकट होत हैं।
761. क्षाम (क्षमा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान धैर्यवान, क्षमाशील अऊर सहनशील हैं।
762. सत्परायण (सतपारायण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सत्य अऊर परम भलाई के प्रति समर्पित हैं।
763.ल्ण (सुपरण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान स्वतंत्रता का प्रतीक दिव्य पंख के साथ पार करत हैं।
764. शुरसेन (Śūrasena) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान वीर अऊर धर्मी ताकतन का नेतृत्व करत हैं।
765. वायुवान (वायुवाहन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान जीवन के धाराओं में हवा के तरह चलत हैं।
766. यदुश छाप (यदुश्रेष्ठ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान कुलीन वंशावली के बीच श्रेष्ठ हैं।
767. धनुर्धर (धनुर्धा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धनुष चलावत हैं, जवन रक्षा अऊर ध्यान केंद्रित करै का प्रतीक है।
768. सन्निवास (सन्निवास) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीव अऊर क्षेत्रन के भीतर रहत हैं।
769. धनुरितद (धनुर्वेद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान युद्ध अऊर अनुशासन के ज्ञान के स्वामी हैं।
770. सुयामुन (सुयामुना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान यमुना के समान पवित्र अऊर सामंजस्यपूर्ण प्रवाह से जुड़ा अहै।
771. दण्ड (Daṇḍa) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान न्याय अऊर अनुशासन प्रदान करत हैं।
७७२.छतावास (भूतावासा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीव-तत्व में बसे हैं।
773. दमयिता (दमायता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब बल का वश मा करत है अऊर नियंत्रित करत है।
774. वासुदेव (वासुदेव) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब मा निवासी उपस्थिति के रूप मा निवास करत हैं।
775. दम (दामा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान आत्मसंयम अऊर संयम का मूर्त रूप देत हैं।
776. सर्वासुनिलय (सर्वासुनिलाय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवन ऊर्जा का धाम है।
777. अपराजित (अपराजिता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अपराजित अजेय हैं।
778. अनल (अनाला) – अधिनायक श्रीमान भस्म करै वाली अऊर परिवर्तनकारी अग्नि है।
779. सर्वसह (सर्वसाह) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब कुछ सहन करत है और साथ देत है।
780. दर्पहा (दरपहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अभिमान अहंकार का नाश करत हैं।
781. नियन्ता (नियान्ता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व का शासन अऊर नियमन करत हैं।
782. दर्पद (दर्पद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान जहाँ जरूरत होय आत्मविश्वास अऊर ताकत प्रदान करत हैं।
783. अन (अनियामा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब थोपे गए नियम अउर सीमा से परे हैं।
784. दृप्त (द्रिप्त) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान बोल्ड अऊर शक्तिशाली उपस्थिति के रूप मा प्रकट होत हैं।
785. अयम (अयाम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान असीम अप्रतिबंधित है।
786.दुर्धरा (दुर्धारा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान को रोकना या पार करना कठिन है।
787. सत्त्ववान् (सत्त्वान) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्रता, संतुलन अऊर गुण से भरा अहै।
788. अपराजित (अपराजिता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सदा अपराजित और परम रहैं।
789. सात्त्विक (सत्त्विका) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान स्पष्टता, सामंजस्य अऊर अच्छाई का मूर्त रूप देत हैं।
790. दुनियामूर्ति (विश्वमूर्ति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान खुद पूरे ब्रह्मांड के रूप मा प्रकट होत है।
791. सत्य (सत्य) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनन्त सत्य है जो सब अस्तित्व का आधार है।
792. महामूर्ति (महामूर्ति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान भव्य अऊर विशाल ब्रह्मांडीय रूप मा प्रकट होत हैं।
793. सत्यधर्मपरायण (सत्यधर्मपारायण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सत्य अऊर धर्म के प्रति पूर्ण समर्पित हैं।
794. दीप्तमूति (दिप्तामूर्ति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान उज्ज्वल अऊर उज्ज्वल रूप से चमकत हैं।
795. अभिप्राय (अभिप्राय) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सृष्टि का मार्गदर्शन करै वाली सबसे गहरी मंशा रखत हैं।
796. अमूर्तिमान् (अमूर्तिमान) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब रूपन से परे मौजूद हैं, जबकि ओनका समाहित करत हैं।
797. प्रियार्ह (प्रियर्हा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान प्रेम अऊर भक्ति के लायक हैं।
798. अनेकमूर्ति (अनेकमूर्ति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनगिनत रूपन मा प्रकट होत हैं।
799. अर्ह (अरहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम पूजन औ सम्मान के हकदार हैं।
800. अव्यक्त (अव्यक्त) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अव्यक्त अऊर बोध से परे हैं।
801. प्रियकृत् (प्रियकृत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान उ करत हैं जवन भक्तन का प्रिय अऊर लाभदायक होत है।
802. शतमूति (Śatamurti) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सैकड़न रूपन मा प्रकट होत हैं।
803. प्रीतिवर्धन (प्रतिवर्धना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सबके मन मा प्रेम अऊर भक्ति बढ़ावत है।
804. शतानन (Śatānana) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के सर्वव्यापीता का प्रतीक अनगिनत चेहरे हैं।
805. विहायसगति (विहायसागति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अंतरिक्ष के विशाल विस्तार मा स्वतंत्र रूप से चलत हैं।
806. एक (एका) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान एक परम वास्तविकता है।
807. जटोति (ज्योति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सबका रोशन करै वाला दिव्य ज्योति है।
८०८.माक (नाइका) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनेक हैं जबकि एक रहैं।
809. सुरुचि (सुरुचि) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सुन्दर मनभावन स्वभाव के हैं।
810. सव (सवा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र प्रसाद और कर्म का सार है।
811. हुतभुक् (हुतभुक) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र अग्नि में प्रसाद भस्म करत हैं।
812. कः (Kaḥ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सवाल से परे रहस्यमय सिद्धांत है।
813. विभु (विभु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सर्वव्यापी अऊर सर्वशक्तिमान हैं।
814. किं (किम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अस्तित्व के पीछे परम जांच है।
815.रावि (रवि) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान जीवन संरक्षक सूर्य समान चमकत हैं।
816. यत् (यात) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान वह है जो सब का आधार है जो मौजूद है।
817. विरोचन (विरोचन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान तेजस्वी अऊर रोशनी का विकिरण करत हैं।
818. तत् (तत) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान पूर्ण वास्तविकता है जेका "वह" कहा जात है।
819. सूर्य (Sūrya) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ऊर्जा अऊर जीवन के उज्ज्वल स्रोत हैं।
820.पद्मनुत्तमम् (पदमानुत्तम्म) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्राप्ति से परे परम अवस्था है।
821. सविता (सविता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवन के निर्माता अऊर ऊर्जावान हैं।
822. लोकबन्धु (लोकाबंधु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवों के मित्र और सहायता हैं।
८२३.राविलोचन (रविलोचन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सूरज के तेज से देखत हैं।
824. लोकनाथ (लोकानाथ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब लोक के स्वामी हैं।
825. अनंत (अनन्ता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनंत अउ अंतहीन है।
826.माधव (माधव) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान समरसता, समृद्धि, अउर मिठास के स्रोत हैं।
८२७.हुतभुक् (हुतभुक) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान फिरि सब प्रसाद ग्रहण औ परिवर्तित करै ॥
828. भक्तावत्सल (भक्तावत्सला) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान भक्तन के प्रति गहरा प्यार अऊर देखभाल करत हैं।
829. भोक्ता (भोक्ता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब कर्म के परम अनुभवी हैं।
830. सुवर्णवर्ण (सुवर्णवर्ण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सुनहरा, उज्ज्वल रूप से चमकत हैं।
831. सुखद (सुखदा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीवों को सुख-कल्याण प्रदान करत हैं।
832. हेमाङ्ग (हेमांग) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान के पास दिव्य वैभव का प्रतीक एक उज्ज्वल स्वर्ण रूप है।
833.कज (नाइकाजा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनेक जन्म प्रकट में प्रकट होत हैं।
834. वराङ्ग (वरांग) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान का सुन्दर और शुभ रूप है।
835. अग्रज (अग्रजा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सबके प्रथम जनम औ उत्पत्ति हैं।
836. चन्दनाङ्गदी (Candanāṅgadī) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान चंदन अऊर दिव्य आभूषणन से सजी अहै।
837. अनिर्विण्ण (अनिर्विण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान कभी थकते नहीं हैं और सृष्टि को बनाए रखने में हमेशा लगे रहत हैं।
838. वीरहा (वीरहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पराक्रमी का अभिमान दूर कर सबका विजय लेत है।
839. सदामर्षी (सदामार्षी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सदा क्षमाशील अऊर धैर्यवान हैं।
840. विषम (विशमा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अतुलनीय अऊर समता से परे हैं।
841. लोकाधिष्ठानाम् (लोकाधिष्ठानम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान वह नींव है जिस पर सब जगत खड़े हैं।
842. शून्य (Śūnya) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शून्य के अवधारणा का भी पार करत हैं।
843. अद्भुत (अद्भुत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अद्भुत अउ कल्पना से परे है।
844. घृता शी (घृताशी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान पवित्रता के साथ प्रसाद प्राप्त करत हैं अऊर पवित्र अनुष्ठानन का संरक्षण करत हैं।
845. सनात् (सनात) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान प्राचीन औ अनन्त हैं।
846. अचल (अकाला) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सार मा स्थिर अऊर अचल हैं।
847. सनातनतम (सनातनतम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अनन्त मा सबसे शाश्वत हैं।
848. पु (कला) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान भी आंदोलन अऊर परिवर्तन के रूप मा प्रकट होत हैं।
849. कपिल (कपिल) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ज्ञान ज्ञान के ऋषि प्रकट होत हैं।
850. अमानी (अमानी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अहंकार अऊर घमंड से मुक्त हैं।
851. कपि (कपि) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ताकत, फुर्ती अऊर गतिशील ऊर्जा का प्रतीक है।
852. मानद (मानद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सबका मान सम्मान देत है।
853. अव्यय (अव्यया) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अविनाशी अउ अपरिवर्तनीय हैं।
854. मान्य (मान्य) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान श्रद्धा सम्मान के लायक हैं।
८५५. स्वस्तिद (स्वस्तिदा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान कल्याण औ मंगल प्रदान करत हैं।
856. लोकस्वामी (लोकस्वामी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जगत के स्वामी हैं।
857. स्वस्तिकृत् (स्वास्तिकृत्) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान कल्याण अऊर सद्भाव का निर्माण अऊर सुनिश्चित करत हैं।
858. त्रिलोकध्रक् (त्रिलोकध्रिक) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान तीन लोकन का धारण अऊर संरक्षण करत हैं।
859. स्वस्ति (स्वास्ति) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शुभता का मूर्त रूप है।
860. सुमेधा (सुमेधा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान गहन बुद्धि अऊर ज्ञान रखत हैं।
861. स्वस्तिभुक् (स्वस्तिभुक) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शुभ भोग करत हैं अऊर संरक्षण करत हैं।
862.मेधज (मेधजा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य बुद्धि औ ज्ञान से उत्पन्न होत है।
863. स्वस्तिदक्षिण (स्वस्तिदक्षिण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उदारता से कल्याण आशीर्वाद प्रदान करत हैं।
864. धन्य (धन्य) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धन्य हो जात है अउर दूसरन का धन्य बनावत है।
865. अरौद्र (अरौद्र) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान कोमल और क्रोध मुक्त हैं।
866. सत्यमेधा (सत्यमेधा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास सत्य अऊर पूर्ण ज्ञान है।
867. कुण्डली (Kuṇḍalī) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दिव्य आभूषण अऊर ऊर्जा कुंडली से सुशोभित हैं।
868. धराधर (धराधारा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धरती का सहारा सहन करत हैं।
869. चक्री (Cakrī) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान रक्षा का प्रतीक दिव्य चक्र चलावत हैं।
870. शिडोवृष (तेजोवृष) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सबके ऊपर तेजस्वी अऊर ऊर्जा बरसावत हैं।
871.जन्मृतुजरातिग (जन्मा-मृत्यु-जरातिग) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान जन्म, मृत्यु अऊर बुढ़ापा से पार करत हैं।
872. द्युतिधर (द्युतिधारा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान धारण करत हैं औ दिव्य तेज विकिरण करत हैं।
873. बनाभुवःस्वस्तरु (भुरभुवाः-स्वस्तरु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अस्तित्व के सब क्षेत्रन का बनाए रखै वाला ब्रह्मांडीय वृक्ष है।
874. सर्वशत्रभृतांवर (सर्वशस्त्रभृताँ-वर) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब हथियार धारकन मा श्रेष्ठ हैं।
875.बाद (तारा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान प्राणियन का कठिनाइयन के पार मार्गदर्शन अऊर ले जात हैं।
876. प्रग्रह (प्रग्रह) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्रसाद अऊर बल का ग्रहण अऊर नियंत्रित करत हैं।
877. सविता (सविता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जीवन का ऊर्जावान अऊर बनावत हैं।
878. निग्रह (निग्रह) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान जब आवश्यक हो तब संयम अऊर अनुशासन करत हैं।
879.प्रपितामह (प्राप्तामहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब पुरखन के पुरखा हैं।
880. व्यग्र (व्यग्र) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सृष्टि का बनाए रखै मा सदा सक्रिय अऊर चौकस रहत हैं।
881. यज्ञ (यज्ञ) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान खुद यज्ञ का पवित्र कर्म है।
882. नैकशृङ्ग (नाइकाशृंगा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान कईयो सींगन से प्रतीकित अनेक शक्तियन के साथ प्रकट होत हैं।
883. यज्ञपति (यज्ञपति) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब यज्ञ के स्वामी हैं।
884. गदाग्रज (गदागराज) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य शक्ति अऊर बल मा बड़का हैं।
885. यजवा (यज्वा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र अनुष्ठान करत हैं अऊर पालन करत हैं।
886. चतुर्मूति (चतुर्मूर्ति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान चार प्राथमिक रूपन मा प्रकट होत हैं।
887. यज्ञाङ्ग (यज्ञगा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान यज्ञ का हर घटक है।
888. चतुर्बाहु (Caturbāhu) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शक्ति अऊर रक्षा के प्रतीक चार भुजाओं के साथ प्रकट होत हैं।
889. यज्ञवाहन (यज्ञवाहन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान यज्ञ प्रसाद का ढोवत हैं अऊर संभालत हैं।
890. चतुर्वुह (Caturvyūha) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य कार्य के चार गुना उत्सर्जन मा प्रकट होत है।
891. यज्ञभृत् (यज्ञभ्रित) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब यज्ञन का सहारा देत हैं अऊर रखत हैं।
892. चतुर्गति (चतुर्गति) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अस्तित्व के चार मार्गन का नियंत्रित करत हैं।
893. यज्ञकृति (यज्ञकृत्) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान यज्ञ कर्म का दीक्षा देत हैं अऊर करत हैं।
894. चतुरात्मा (Caturātmā) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान चेतना के चार पहलुओं के रूप में प्रकट होत हैं।
895. यज्ञी (यज्ञी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब यज्ञ के योग्य हैं।
896. चतुर्भाव (Caturbhava) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान अस्तित्व के चार मौलिक अवस्थाओं का मूर्त रूप देत हैं।
897. यज्ञभुक् (यज्ञभुक) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब यज्ञ प्रसाद स्वीकार करत हैं अऊर आनंद लेत हैं।
898. चतुर्वेदवित् (Caturvedavit) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान चारों वेद को पूर्ण जानत हैं।
899. यज्ञसाधन (यज्ञसाधन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान यज्ञ का साधन और प्रक्रिया है।
900. एकपात् (एकापात) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सबका बनाए रखै वाले एकल ब्रह्मांडीय पहलू के रूप मा प्रकट होत है।
901. यज्ञान्तकृत् (यज्ञताकृत्) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब यज्ञन का पूर्णता लावत हैं।
902. समार (समावर्त) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान चक्कर लगावत हैं अऊर सब सृष्टि का एकता मा लौटावत हैं।
903. यज्ञ गुह्यम् (यज्ञगुह्याम्) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब यज्ञ का छुपा सार है।
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905. अन्नं (अन्नम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्राणियन के भोजन अऊर पोषण हैं।
906.दुर्जय (दुर्जया) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अजेय है न पराजित हो सकत है।
907. अन्नाद (अन्नाद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान भोजन के दाता अऊर भोगकर्ता हैं।
९०८. दुरति टिप (दूरतिक्रम) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान न पार हो सकत है न पार हो सकत है।
909. आत्मयोगिनी (Ātmayoni) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान स्वयं पैदा होत हैं, अपने सार से उत्पन्न होत हैं।
910.दुर्लभ (दुर्लभ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सच्ची भक्ति के बिना साकार करब दुर्लभ अऊर कठिन है।
९११. स्वयंजात (स्वयंजात) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान बिना बाह्य कारण के खुद से प्रकट होत है।
912. दुर्गम (दुर्गामा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान साधारण साधन से पहुँचना कठिन है।
913. वैखान (वैखाना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान गहरी ध्यान परम्परा के माध्यम से जाने जात हैं।
914. दुर्ग (दुर्गा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब नकारात्मकता के खिलाफ रक्षात्मक गढ़ हैं।
915. सामगायन (Sāmagāyana) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान का स्तुति पवित्र जाप अऊर राग के माध्यम से कीन जात है।
916.दुरावासा (दुरावास) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्रता औ अनुशासन के बिना पहुँचब कठिन है।
917. देवकीनन्दन (देवकीनंदन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान संसार मा आनन्द लावै वाले दिव्य शिशु के रूप मा प्रकट होत हैं।
९१८. दुरारिहा (दुरारिहा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दुर्जेय शत्रुन का भी नास करत है।
919. सृष्टा (श्रीष्टा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व के निर्माता हैं।
920. शुभाङ्ग (Śubhāṅga) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास शुभ अऊर सुंदर रूप है।
९२१. आयीश (क्षितिशा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पृथ्वी के स्वामी हैं।
922. लोकसारङ्ग (लोकसारांग) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब लोकन के सार के माध्यम से चलत हैं अऊर बनाए रखत हैं।
923. पापनाशन (पापनासन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पाप अशुद्धि का नाश करत है।
924. सुतन्तु (सुतनतु) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सृष्टि के महीन धागे बुनत हैं।
925. शङ्खभृत् (Śaṅkhabhṛt) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य ध्वनि का प्रतीक शंख रखत हैं।
926. तन्तुवर्धन (तंतुवर्धन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अस्तित्व के ताना-बाना का विस्तार अऊर पोषण करत हैं।
927. नन्दकी (Nandaki) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान ज्ञान के दिव्य तलवार चलावत हैं।
928. द्द्रकर्मा (इंद्रकर्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शक्तिशाली औ परम कर्म करत हैं।
929. चक्री (Cakrī) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान रक्षा अऊर व्यवस्था का प्रतीक चक्र चलावत हैं।
930. महाकर्मा (महाकर्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान महान ब्रह्मांडीय कर्म करत हैं।
931. शार्ङ्गधनवा (Śārṅgadhanva) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य धनुष शरंग चलावत हैं।
९३२.कृतकर्मा (कृताकर्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब कर्म सिद्धि सिद्ध करत हैं।
933. गदाधर (गदाधारा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के पास ताकत अऊर अधिकार का प्रतीक गदा है।
९३४.स्कृतागम (कृतागम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र ग्रन्थ औ परम्परा कै स्थापना करत हैं।
९३५.राथाङ्गपाणि (राथांगपाणि) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान रथ चक्र को रक्षा के हथियार मानते हैं।
936. उद्भव (उद्भाव) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान उ उत्पत्ति है जेहिसे सब उत्पन्न होत है।
937. अक्षोभ्य (Akṣobhya) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अटल अथित रहैं।
938. सुन्दर (सुन्दरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम सुन्दर अऊर सामंजस्यपूर्ण हैं।
939. सर्वप्रहरणायुध (सर्वप्रहरणायुध) 🇮🇳– अधिनायक श्रीमान के पास रक्षा औ न्याय के सब हथियार हैं।
940. सुन्द (सुन्दा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान प्रकृति मा सुंदर अऊर मनभावन है।
941. चतुरश्र (चतुरश्र) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब दिशा मा संतुलित अऊर सिद्ध हैं।
९४२.रात्ननाभ (रत्ननाभ) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान का गहना समान उज्ज्वल केन्द्र है।
943. गभीरात्म (गभीरात्मा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान गहरा अऊर गहरा स्वभाव रखत हैं।
944. सुलोचन (सुलोचन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान के दृष्टि सुन्दर दयालु है।
945. विदिश (विदिश) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब मार्गन का निर्देशित अऊर मार्गदर्शन करत हैं।
946. अण (अर्क) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान उज्ज्वल सूरज के तरह चमकत है।
947. व्यादिश (व्यादिश) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब दिशाओं को आज्ञा औ शासन करत हैं।
948. विपरी (विक्रमी) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शक्तिशाली कदम अऊर वीरता के साथ काम करत हैं।
949. दिश (दिश) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान स्वयं दिशा और मार्गदर्शन है।
950. उर्जितशासन (Ūrjitśāsana) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान शक्तिशाली अऊर दृढ़ अधिकार के साथ शासन करत हैं।
951. अनादि (अनादी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अआदि अनन्त है।
952.wordातिग (Śabdātiga) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब शब्दन अऊर अभिव्यक्तियन से पार है।
953. भुवोभुव (भुवोभव) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब लोक और अस्तित्व का स्त्रोत है।
954.wordसह (Śabdasha) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब ध्वनि अऊर अभिव्यक्ति का ग्रहण करत हैं अऊर बनाए रखत हैं।
955. लक्ष्मी (लक्ष्मी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दिव्य समृद्धि अऊर अनुग्रह का मूर्त रूप देत हैं।
956. शिशिर (Śishira) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान एक कोमल मौसम के तरह शांत, सुखदायक अऊर शांत है।
957. सुवीर (सुवीरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम वीर अऊर बलवान हैं।
958. शर्श्वरीकर (Śarvarīkara) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान रात के तरह विश्राम शांति लावत हैं।
959. अधाता (अधता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब सहारा से परे है फिर भी सबका धारण करत है।
960. अक्रुर (अक्रुरा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान दयालु, दयालु अऊर क्रूरता से मुक्त हैं।
961.बुनिलय (Ādhāranilaya) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व का आधार और विश्राम है।
962. पेशल (पेशला) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान कोमल, परिष्कृत अऊर सुशोभित हैं।
963. ऊर्ध्वग (Ūrdhvaga) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्राणियन का उच्च अवस्था मा उठावत हैं।
964. दक्ष (दक्ष) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान कुशल, सक्षम अऊर कुशल हैं।
965. एकात्मा (Ekātmā) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब प्राणी मा एक एकीकृत स्वयं है।
966.उन (दक्षिणा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान उदार, दयालु, अऊर परोपकारी हैं।
९६७.जनजन्मादि (जनजनमादी) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब जन्म औ जीवन चक्र कै उत्पत्ति है।
968. क्षमिणां वर (Kṣamiṇāṁ वर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान क्षमा करै वालेन मा श्रेष्ठ हैं।
969.जान (जनना) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सृष्टि जन्म का स्त्रोत है।
970. विद्वत्तम (विद्वतत्तम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सबसे विद्वान औ ज्ञानी हैं।
971. तत्त्वं (तत्तवं) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान परम सत्य अऊर सार हैं।
972. वीतभय (वितभया) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान भय से मुक्त होकर परों में भय दूर करत...
973. तत्त्ववित् (तत्त्वित) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान वास्तविकता के असली स्वरूप का पूरा जानत हैं।
974. पुण्यश्र्वणकीर्तन (पुण्यश्रवणकीर्तन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सुनै औ स्तुति करै वालेन का शुद्ध करत हैं।
975. (पाण) – अधिनायक श्रीमान मूल्य, प्रतिबद्धता अऊर पवित्र आदान-प्रदान स्थापित करत हैं।
976.मुखतारण (उत्तराण) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सांसारिक सीमाओं के पार सब प्राणियन का उत्थान अऊर मुक्त करत हैं।
975. पण (पाण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पवित्र मूल्य, प्रतिबद्धता अऊर उद्देश्यपूर्ण आदान-प्रदान स्थापित करत हैं।
976.मुखतारण (उत्तराण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सांसारिक सीमा से परे प्राणियन का उत्थान अऊर मुक्त करत हैं।
977. पुष्पहास (पुष्पहासा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान फूल के समान कोमल, उज्ज्वल मुस्कान के साथ खिलता है।
978. दुष्कृतिहा (दुष्कृतिहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पाप कर्मन अऊर नकारात्मकता का नाश करत हैं।
९७९. प्रजागर (प्रजागर) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सदा जागृत रहत हैं, सतर्कता से सृष्टि का संभालत हैं।
980. पुण्य (पुण्य) –🇮🇳 आदिनायक श्रीमान पवित्र पुण्य अऊर गुण का मूर्त रूप देत हैं।
981. प्रणव (प्राणव) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान आदिम ध्वनि "ॐ" है, जवन सब कंपन का स्रोत है।
982. दूःस्वप्नशन (दुःस्वप्ननाशन) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान बुरे सपने अऊर भीतर के भय का दूर करत है।
983. प्रमाणम् (प्रमाणम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सत्य ज्ञान का परम मानक है।
984. वीरहा (वीरहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान पराक्रमी के अभिमान का वश मा करत है अऊर संतुलन बहाल करत है।
985. प्राणजीवन (प्राणाजीवन) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान प्राण-शक्ति के भीतर का जीवन है।
९८६.राक्षण (रक्षण) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब अस्तित्व का रक्षा संरक्षण करत हैं।
987. प्राणद (प्राणद) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान जीवन-ऊर्जा प्रदान करत हैं अऊर बनाये रखत हैं।
988. सन्त (संता) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान शांतिपूर्ण, शुद्ध अऊर प्रकृति मा संत हैं।
989. प्राणनिलय (प्राणनिलय) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब जीवन ऊर्जा का धाम है।
990. जान (जीवाना) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सब प्राणी मा जीवन ही है।
991. प्राणभृत् (प्राणभ्रत) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान प्राण-शक्ति का पोषण अऊर संरक्षण करत हैं।
992.पर्यव उत्ित (पर्यावस्थिता) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान हर जगह व्याप्त अउ स्थापित रहत हैं।
993. भीम (भीमा) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान दुर्जेय अऊर विस्मयकारी हैं।
994. अनंतरूप (अनंतरुप) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान अनंत रूप मा प्रकट होत है।
995. भीमपररा (भीमपराक्रम) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान मा अपार अऊर भयानक वीरता है।
९९६. अनन्तश्री (अनंतश्री) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान का अनन्त समृद्धि महिमा है।
997. रुचिराङ्गद (Rucirāṅgada) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान सुन्दर औ उज्ज्वल आभूषणन से सजी अहै।
998. जितमन्यु (जित्मान्यु) –🇮🇳 आधिनायक श्रीमान ने क्रोध को पूरी तरह से जीत लिया है।
999. विश्वम (विश्वम्) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान खुद पूरा ब्रह्माण्ड है।
१०००. भियापह (भयापहा) –🇮🇳 अधिनायक श्रीमान सब भय दूर कर सुरक्षा प्रदान करत हैं।
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