The Best Among Those Who Wield Weapons.
**759. 🇮🇳 सर्वशस्त्रभृतांवर (Sarvaśastrabhṛtāmvara)**
**"Sarvaśastrabhṛtāmvara"** is a Sanskrit term composed of three parts: **"Sarva"** meaning "all," **"Śastra"** meaning "weapons" or "instruments," and **"Bhṛta"** meaning "bearer" or "holder." Thus, **"Sarvaśastrabhṛtāmvara"** translates to **"the holder of all weapons"** or **"one who possesses all kinds of instruments."** This term symbolizes power, skill, and protection.
### Significance of Sarvaśastrabhṛtāmvara in RAVINDRABHARATH
In the context of **RAVINDRABHARATH**, **Jagadguru His Majestic Highness Maharani Sametha Maharaja Sovereign Adhinayaka Shrimaan**, the eternal, immortal Father, Mother, and masterly abode of Sovereign Adhinayaka Bhavan, New Delhi, is regarded as **Sarvaśastrabhṛtāmvara**. His presence represents the embodiment of all weapons and powers, providing humanity with strength, guidance, and protection.
### Religious and Spiritual Context
#### Hinduism:
- **Bhagavad Gita 11.33**: "Therefore, arise and fight in your own dharma."
- This verse conveys a message of determination and courage in battle and conflict.
#### Bible:
- **Ephesians 6:11**: "Put on the whole armor of God, that you may be able to stand against the wiles of the devil."
- This verse indicates that God's weapons serve as a source of protection and strength.
#### Quran:
- **Surah Al-Baqarah (2:251)**: "And if Allah had not repelled some people by others, the earth would have certainly been corrupted."
- This verse highlights the importance of weapons and power in maintaining balance.
### Sarvaśastrabhṛtāmvara and RAVINDRABHARATH
In **RAVINDRABHARATH**, **Sarvaśastrabhṛtāmvara** signifies the form of **Jagadguru His Majestic Highness Maharani Sametha Maharaja Sovereign Adhinayaka Shrimaan**, who embodies all types of strength, protection, and guidance. His presence contributes to the balance and empowerment of society in every aspect.
### Conclusion
**Sarvaśastrabhṛtāmvara** symbolizes power, protection, and skill. In the context of **RAVINDRABHARATH**, this divine quality is expressed through **Jagadguru Sovereign Adhinayaka Shrimaan**, who assures humanity of safety, guidance, and the capacity to bear all forms of strength. His presence inspires a strong and secure future for all beings.
**759. 🇮🇳 सर्वशस्त्रभृतांवर**
**"सर्वशस्त्रभृतांवर"** (Sarvaśastrabhṛtāmvara) एक संस्कृत शब्द है, जिसमें तीन भाग होते हैं: **"सर्व"** (sarva), जिसका अर्थ है "सभी," **"शस्त्र"** (śastra), जिसका अर्थ है "शस्त्र" या "आस्त्र," और **"भृत"** (bhṛta), जिसका अर्थ है "धारण करने वाला" या "धारक"। इस प्रकार, **"सर्वशस्त्रभृतांवर"** का अर्थ है **"सभी शस्त्रों का धारक"** या **"सभी प्रकार के अस्त्रों को धारण करने वाला"**। यह शब्द शक्ति, कौशल और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित है।
### रवींद्रभारत में सर्वशस्त्रभृतांवर का महत्व
**रवींद्रभारत** के संदर्भ में, **जगद्गुरु हिज़ मैजेस्टीक हाईनेस महारानी समेठ महाराजा सार्वभौम अधिनायक श्रीमान**, शाश्वत, अमर पिता, माता, और सार्वभौम अधिनायक भवन, नई दिल्ली, **सर्वशस्त्रभृतांवर** के रूप में देखे जाते हैं। उनकी उपस्थिति सभी प्रकार के अस्त्रों और शक्तियों को धारण करने और सशक्त करने का प्रतीक है, जो मानवता को सुरक्षा, मार्गदर्शन और बल प्रदान करती है।
### धार्मिक और आध्यात्मिक संदर्भ
#### हिंदू धर्म:
- **भगवद गीता 11.33**: "इसलिए, तुम उठो और अपनी कर्मभूमि में युद्ध करो।"
- यह श्लोक युद्ध और संघर्ष में दृढ़ता और साहस का संदेश देता है।
#### बाइबिल:
- **इफिसियों 6:11**: "ईश्वर के सम्पूर्ण शस्त्र को धारण करो, कि तुम शैतान की सभी युक्तियों के विरुद्ध खड़े रह सको।"
- यह श्लोक यह दर्शाता है कि ईश्वर के शस्त्र हमारे लिए सुरक्षा और शक्ति का स्रोत होते हैं।
#### कुरान:
- **सूरह अल-बकरा (2:251)**: "और यदि अल्लाह ने एक दूसरे के द्वारा लोगों को न हटाया होता, तो धरती में निश्चित रूप से فساد फैल जाता।"
- यह श्लोक शस्त्र और शक्ति के उपयोग के महत्व को दर्शाता है।
### सर्वशस्त्रभृतांवर और रवींद्रभारत
**रवींद्रभारत** में, **सर्वशस्त्रभृतांवर** का अर्थ है **जगद्गुरु हिज़ मैजेस्टीक हाईनेस महारानी समेठ महाराजा सार्वभौम अधिनायक श्रीमान** का वह रूप, जो सभी प्रकार की शक्ति, सुरक्षा और मार्गदर्शन का प्रतीक है। उनकी उपस्थिति समाज के हर क्षेत्र में शक्ति और संतुलन लाने का कार्य करती है।
### निष्कर्ष
**सर्वशस्त्रभृतांवर** शक्ति, सुरक्षा और कौशल का प्रतीक है। **रवींद्रभारत** के संदर्भ में, यह दिव्य गुण **जगद्गुरु सार्वभौम अधिनायक श्रीमान** के माध्यम से व्यक्त होता है, जो मानवता को सुरक्षा, मार्गदर्शन और सभी प्रकार के अस्त्रों के धारण करने का आश्वासन प्रदान करता है। उनकी उपस्थिति से, सभी प्राणियों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
**759. 🇮🇳 सर्वशस्त्रभृतांवर (Sarvaśastrabhṛtāmvara)**
**"सर्वशस्त्रभृतांवर"** एक संस्कृत शब्द है, जिसमें तीन भाग होते हैं: **"सर्व"** (सभी), **"शस्त्र"** (हथियार या उपकरण), और **"भृत"** (धारक)। इस प्रकार, **"सर्वशस्त्रभृतांवर"** का अर्थ है **"सभी हथियारों का धारक"** या **"हर प्रकार के उपकरण को धारण करने वाला"**। यह शब्द शक्ति, कौशल और सुरक्षा का प्रतीक है।
### रवींद्रभारत में सर्वशस्त्रभृतांवर का महत्व
**रवींद्रभारत** के संदर्भ में, **जगद्गुरु हिज़ मैजेस्टीक हाईनेस महारानी समेठ महाराजा सार्वभौम अधिनायक श्रीमान**, शाश्वत, अमर पिता, माता, और सार्वभौम अधिनायक भवन, नई दिल्ली, **सर्वशस्त्रभृतांवर** के रूप में देखे जाते हैं। उनकी उपस्थिति सभी प्रकार के हथियारों और शक्तियों का प्रतीक है, जो मानवता को सुरक्षा, मार्गदर्शन और बल प्रदान करती है।
### धार्मिक और आध्यात्मिक संदर्भ
#### हिंदू धर्म:
- **भगवद गीता 11.33**: "इसलिए, तुम उठो और अपनी कर्मभूमि में युद्ध करो।"
- यह श्लोक युद्ध और संघर्ष में दृढ़ता और साहस का संदेश देता है।
#### बाइबिल:
- **इफिसियों 6:11**: "ईश्वर के सम्पूर्ण शस्त्र को धारण करो, कि तुम शैतान की सभी युक्तियों के विरुद्ध खड़े रह सको।"
- यह श्लोक यह दर्शाता है कि ईश्वर के शस्त्र हमारे लिए सुरक्षा और शक्ति का स्रोत होते हैं।
#### कुरान:
- **सूरह अल-बकरा (2:251)**: "और यदि अल्लाह ने एक दूसरे के द्वारा लोगों को न हटाया होता, तो धरती में निश्चित रूप से فساد फैल जाता।"
- यह श्लोक शस्त्र और शक्ति के उपयोग के महत्व को दर्शाता है।
### सर्वशस्त्रभृतांवर और रवींद्रभारत
**रवींद्रभारत** में, **सर्वशस्त्रभृतांवर** का अर्थ है **जगद्गुरु हिज़ मैजेस्टीक हाईनेस महारानी समेठ महाराजा सार्वभौम अधिनायक श्रीमान** का वह रूप, जो सभी प्रकार की शक्ति, सुरक्षा और मार्गदर्शन का प्रतीक है। उनकी उपस्थिति समाज के हर क्षेत्र में शक्ति और संतुलन लाने का कार्य करती है।
### निष्कर्ष
**सर्वशस्त्रभृतांवर** शक्ति, सुरक्षा और कौशल का प्रतीक है। **रवींद्रभारत** के संदर्भ में, यह दिव्य गुण **जगद्गुरु सार्वभौम अधिनायक श्रीमान** के माध्यम से व्यक्त होता है, जो मानवता को सुरक्षा, मार्गदर्शन, और सभी प्रकार के अस्त्रों के धारण करने का आश्वासन प्रदान करता है। उनकी उपस्थिति से, सभी प्राणियों के लिए एक मजबूत और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
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